पानीपत। देश भर में वीरवार को अंतरराष्ट्रीय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस मनाया जाएगा। इस पर स्वास्थ्य विभाग जागरूकता कार्यक्रम भी करेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को उनके निवास के आसपास ही पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है लेकिन सरकार आजादी के 77 साल बाद भी लोगों को उनके निवास स्थान के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे पाई है। जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की हालत आज भी दयनीय है।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर दवा की कमी रहती है।
अगर कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल हो तो उन्हें 30-40 किलोमीटर दूर जिला नागरिक अस्पताल में लाना पड़ता है, क्योंकि सामुदायिक केंद्रों में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। जिससे घायल की जान बचाई जा सके। जिला नागरिक अस्पताल व समालखा सामान्य अस्पताल को छोड़ किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज के इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है।
14 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मुख्यत: जिला नागरिक अस्पताल पर निर्भर करती है। यह 200 बेड का अस्पताल डॉक्टरों की कमी से सालों से जूझ रहा है।
यहां नियमानुसार 86 डॉक्टर होने चाहिए लेकिन यह संख्या महज 36 है। इनमें भी एक सिविल सर्जन, पांच डिप्टी सिविल सर्जन, एक एमएस व दो डिप्टी एमएस हैं जो ओपीडी नहीं करते। महज 27 डॉक्टर ही लोगों को स्वास्थ्य लाभ देते हैं। सिर में चोट के 90 प्रतिशत रोगी ट्रामा सेवाओं के अभाव में रोहतक पीजीआई रेफर होते हैं। कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी व ह्दय रोगियों के लिए यहां एंजियोग्राफी की सेवाएं भी उपलब्ध नहीं है।