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27 साल बाद दिवाली पर सूर्यग्रहण का संयोग, जीवन में लाएगा बदलाव

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पानीपत। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल अमावस्या तिथि पर साल का दूसरा व आखिरी सूर्यग्रहण लग रहा है। हालांकि यह सूर्यग्रहण अमावस्या तिथि के समाप्त होने पर लग रहा है। दिवाली पर सूर्यग्रहण का ऐसा संयोग करीब 27 साल पहले 1995 में बना था।
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दिवाली पर लगने वाला सूर्यग्रहण का जीवन में असर-
मेष- मेष राशि के जातकों के वैवाहिक जीवन में अनबन हो सकती है। मानसिक तनाव बढ़ेगा।
वृषभ- वृषभ राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण सुखकारी साबित होगा।
मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण कष्टकारी साबित हो सकता है। मानसिक तनाव रहेगा।
कर्क- कर्क राशि वालों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी रहने वाला है।
सिंह- सिंह राशि वालों को इस ग्रहण से आंशिक लाभ हो सकता है।
कन्या- कन्या राशि वालों को ग्रहण काल में आर्थिक नुकसान हो सकता है।
तुला- तुला राशि वालों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी साबित हो सकता है।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रहण नुकसानदायक साबित हो सकता है। हानि की आशंका है।
धनु- धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण लाभकारी साबित हो सकता है।
मकर- मकर राशि वालों के लिए यह ग्रहण खुशखबरी लेकर आ सकता है।
कुंभ- कुंभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण अशुभ साबित हो सकता है। आपके मान-सम्मान को ठेस पहुंच सकती है।
मीन- मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी साबित हो सकता है।
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- सूर्य ग्रहण पर बन रहे हैं महाभारत काल जैसे अशुभ संयोग
ज्योतिषाचार्यों की मानें तो एक पखवाड़े के भीतर दो ग्रहण का होना विश्व के लिए शुभ नहीं है। महाभारत काल में भी 15 दिन में दो सूर्यग्रहण लगा था। उस समय महायुद्ध हुआ जिसमें लाखों लोग हताहत हुए। वर्तमान में भी विश्व में सर्वत्र तनाव है। दुनिया विश्वयुद्ध के कगार पर खड़ी है। मानवता के समक्ष घोर संकट है। विश्व में लोग अभाव, भुखमरी और गहन शारीरिक-मानसिक तनाव से त्रस्त हैं। कोई समाधान नहीं समझ आ रहा। ऐसी स्थिति में मानवीय ज्ञान के अन्यतम श्रोत वेदों की शरण जाने के सिवा कोई मार्ग नहीं है। वेदों में महाविनाश और अनिष्ट टालने के लिए अचूक मंत्र और यज्ञों के विधान हैं। जिन्हें अपनाकर विश्व को बचाया जा सकता है।
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- ग्रस्ताग्रस्त है सूर्य ग्रहण, उदय के बाद करें पूजा-पाठ,
दीपावली के अगले दिन पड़ने वाला सूर्य ग्रहण खंडग्रास नहीं अपितु ग्रस्तास्त ग्रहण है। इस निर्णय की घोषणा श्रीकाशी विद्वत परिषद ने शनिवार को बैठक के बाद की। परिषद के अनुसार ग्रहण का मोक्ष सूर्यास्त (5:38 बजे) के 54 मिनट बाद भारतीय समयानुसार 06.32 बजे होगा, इसलिए यह ग्रस्तास्त सूर्यग्रहण है। अगला सूर्योदय होने के बाद ही ग्रहण की धर्म शास्त्रत्तीय निवृत्ति मानी जाएगी। पूजा-पाठ, राग-भोग आदि कृत्य अगले सूर्योदय (06:02 बजे) के बाद ही होंगे।
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- सुबह से बंद रहेंगे सभी मंदिर
सूर्यग्रहण काल: 25 अक्तूबर
-स्पर्श: शाम 04:42 बजे
-मध्यकाल: शाम 05: 02 बजे
-मोक्षकाल: शाम 05: 22 बजे
-सूर्यास्त: शाम 05: 37 बजे
-सूर्यग्रहण सूर्यास्त से 15 मिनट पूर्व समाप्त हो जाएगा
-सूर्यग्रहण की संपूर्ण अवधि 7 घंटा 5 मिनट है किन्तु काशी में सम्पूर्ण सूर्यग्रहण 40 मिनट का है
-8 नवम्बर को खग्रास चंद्रग्रहण दृश्य होगा
- ग्रहण का राशियों पर प्रभाव:
इस वर्ष तुला राशि पर सूर्यग्रहण है। विभिन्न राशियों पर प्रभाव इस प्रकार होंगे। मेष राशि: स्त्री पीड़ा, वृष: सौख्य, मिथुन: चिन्ता, कर्क: व्यथा, सिंह: श्रीप्राप्ति, कन्या: क्षति, तुला: घात, वृश्चिक: हानि , धनु: लाभ, मकर: सुख, कुंभ: माननाश, मीन: मृत्यतुल्य कष्ट।
- कब लगेगा सूतक
इस बार 25 अक्तूबर को सूर्य ग्रहण लग रहा है। सूर्य ग्रहण शाम 4:42 बजे से 5:22 बजे तक रहेगा। इससे 12 घंटे पहले ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा। यानी 24 अक्टूबर से ही सूर्य ग्रहण शुरू हो जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।
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