माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन ने अमेरिका टैरिफ वार के बाद भारत का चीन की तरफ झुकाव को देश अर्थव्यवस्था और एमएसएमई सेक्टर के लिए हानिकारक बताया है।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गुलशन डंग ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से भारत के पक्ष में रहे हैं। भारत अमेरिका को निर्यात करता है और वहां ट्रेड सरप्लस में रहता है। इसके विपरीत, चीन के साथ भारत का समीकरण बिल्कुल उलटा है। पहले से ही चीन के साथ भारी ट्रेड डेफिसिट में हैं। चीन से भारी मात्रा में तैयार माल और औद्योगिक इनपुट आते हैं और बदले में भारत का निर्यात बहुत सीमित है। ऐसे में यदि भारत चीन के साथ व्यापार करेगा तो घाटा और बढ़ेगा।
भारत के एमएसएमई ने पिछले कुछ वर्षों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इलेक्ट्रॉनिक पार्ट, टॉय मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, और टेक्सटाइल अब चीन से आयात पर कम निर्भर है। यदि सरकार चीन से आयात शुल्क घटाती है या बाजार खोलती है तो एक बार फिर सस्ती चीनी वस्तुएं भारतीय बाजार में भर जाएंगी। इसका सीधा असर स्थानीय उत्पादन पर पड़ेगा। एमएसएमई फिर से उसी स्थान पर चला जाएगा। चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनी कीमत और स्केल के दम पर भारतीय कंपनियों को मात दे रही हैं। यदि इन कंपनियों को और खुली छूट दी गई तो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर गंभीर संकट आ सकता है। टिक टॉक और अन्य चीनी डिजिटल प्लेटफॉर्म देश की साइबर सुरक्षा के लिए खतरा हैं।