पानीपत। वाहन चोरी होने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने और बीमा कंपनी को सूचना देने में महज एक दिन की देरी को आधार बनाकर वाहन का क्लेम खारिज करना यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी के इस रवैये को सेवा में स्पष्ट कमी माना है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह परिवादी को 16,973 रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है।
प्रेम मंदिर क्षेत्र निवासी आशीष ने शिकायत में बताया कि 16 जुलाई 2022 की रात करीब साढ़े नौ बजे उनके घर के बाहर से उनकी बाइक चोरी हो गई। उन्होंने इसके तुरंत बाद रात को ही बीमा कंपनी को सूचना दे दी। अगले दिन 17 जुलाई को पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद अदालत से चोरी की अनट्रेस्ड रिपोर्ट मंजूर होने पर सभी दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंप दिए। कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। इसमें बताया कि एफआईआर और कंपनी को सूचना देने में एक दिन की देरी हुई है और पुरानी पॉलिसी की नो क्लेम बोनस (एनसीबी) की डिटेल नहीं दी गई है।
कंपनी खुद कर सकती थी ऑनलाइन जांच
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की सभी आपत्तियों को पूरी तरह निराधार पाया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि घटना के महज पांच घंटे के भीतर ही पुलिस को शिकायत दे दी गई थी। ऐसे में एक दिन की मामूली देरी का तर्क देना पूरी तरह बेमानी है। इसके साथ ही एनसीबी की सत्यता की जांच करना बीमा कंपनी का स्वयं का दायित्व है। इसे वह ऑनलाइन माध्यम या पुरानी बीमा कंपनी से संपर्क कर खुद सत्यापित कर सकती थी। आयोग ने बीमा कंपनी को कड़ी फटकार भी लगाई। इसमें 45 दिन के भीतर क्लेम राशि और हर्जाना पीड़ित को देने केआदेश जारी किए हैं। ब्यूरो