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Panipat News: पुरानी बीमारी बताकर क्लेम किया खारिज, आयोग ने छह प्रतिशत ब्याज के साथ देने के लिए आदेश

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पानीपत। पुरानी बीमारी बताकर क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। आयोग ने उपभोक्ता को राहत देते हुए बीमा कंपनी को 3.27 लाख रुपये क्लेम देने का आदेश दिया है, इसके साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सोनीपत निवासी राजेश ने अपनी फैमिली के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली हुई थी। पॉलिसी की अवधि 27 अगस्त 2021 से 26 अगस्त 2022 तक थी। 18 जुलाई 2022 को उनकी पत्नी कुसुम के दोनों पैरों में गंभीर घाव हो गए, जिसके चलते उन्हें दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज और ऑपरेशन पर करीब 4.86 लाख रुपये खर्च हुए।
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पीड़ित ने पहले कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए आवेदन किया, लेकिन बीमा कंपनी ने इसे मंजूरी नहीं दी। इसके बाद उन्होंने खर्च की भरपाई के लिए क्लेम दाखिल किया, जिसे कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मरीज पहले से ही बीमारी (प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज) से ग्रस्त थी। इसके बाद राजेश अग्रवाल ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दलील दी कि मरीज को पहले से डायबिटीज जैसी बीमारी थी और यह जानकारी छुपाई गई थी। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि सभी जानकारियां पहले ही पॉलिसी में दर्ज थीं और कुछ भी नहीं छुपाया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेज की जांच के बाद आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी का दावा गलत है। आयोग ने माना कि मरीज की पूर्व बीमारी की जानकारी पहले से कंपनी के पास थी, इसलिए क्लेम खारिज करना उचित नहीं था। आयोग ने अपने आदेश में बीमा कंपनी को 3,27,605 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, 11 हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 5,500 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने के भी आदेश दिए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा 12 प्रतिशत ब्याज लागू होगा।
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