मतलौडा। पानीपत के उरलाना कलां गांव में मिलावटी दूध, पनीर और मावे के अवैध कारोबार के दावे पर गुरुद्वारे में रविवार को एक महापंचायत हुई। इसमें ग्रामीणों और किसान संगठनों ने सरकार से भट्टियों को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
उनका आरोप है कि गांव के आसपास करीब 200 ऐसी भट्टियां चल रही हैं। इन भट्टियों से प्रतिदिन 150 क्विंटल तक मिलावटी माल तैयार होता है। यह मिलावटी माल हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के बाजारों में भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब वे मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। महापंचायत में पानीपत, करनाल, चंडीगढ़, असंध और सफीदों सहित विभिन्न क्षेत्रों से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
वहीं उरलाना खुर्द के पूर्व सरपंच सरदार गुरचरण सिंह ने इन भट्टियों के संचालन के सबंध में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केमिकल और पाउडर से नकली उत्पाद बनाए जा रहे हैं।
सरदार गुरचरण सिंह के अनुसार, सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 150 क्विंटल मिलावटी दूध, पनीर और मावा तैयार होता है।
त्योहारी सीजन में यह उत्पादन बढ़कर करीब 300 क्विंटल तक पहुंच जाता है। यह माल दूसरे क्षेत्रों के बाजारों में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि इस मिलावटी कारोबार से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही, असली दूध का कारोबार करने वाले पशुपालकों को भी भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को कई बार शिकायतें दी हैं। इन शिकायतों के बाद छापामारी कर नमूने भी लिए गए। हालांकि, अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है। महापंचायत में प्रशासनिक मिलीभगत के भी गंभीर आरोप लगाए गए। गुरचरण सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी।
इस बैठक में इस मामले में कार्रवाई की मांग की गई थी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक को भी शिकायत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संवाद