पानीपत। दो दिन यलो जोन में रहने के बाद वीरवार को पानीपत का एक्यूआई दोबारा ग्रीन जोन में आ गया है। अब हवा की रफ्तार तेज होने व पराली जलने की घटनाएं लगभग बंद होने से पर्यावरण के स्तर में सुधार हो रहा है।
वीरवार को हवा की रफ्तार 12 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। इससे धूल व धुआ छठ गया है। वीरवार का एयर क्वालिटी इंडेक्स 93 दर्ज किया गया है।
अब हवा में धुएं की मात्रा बेहद कम हो गई है। हवा चलने से स्मॉग की चादर टूट गई है। इसलिए धूल के कण ऊपर उठ रहे हैं और स्मॉग नहीं बन रही। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ काफी हद तक कम हुई है। स्मॉग की चादर टूटने से नेत्र रोग संबंधी ओपीडी में भी कमी आई। सोमवार तक जिला नागरिक अस्पताल की नेत्र संबंधी ओपीडी 200 से अधिक थी।
बुधवार के बाद यह ओपीडी कम हुई है। अब लगभग 150 की औसत से ओपीडी हो रही है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन, लाली व सूजन जैसी समस्याएं बढ़ रही थी। अब अस्थमा संबंधी ओपीडी भी लगातार कम हो रही है। मंगलवार से हवा की रफ्तार बढ़ी है। पिछले हवा की रफ्तार पांच से छह किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच थी। अब यह रफ्तार लगभग दो गुना बढ़ी है। वीरवार को पानीपत में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 91 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। हवा में धुएं की मात्रा भी 92, कार्बन की मात्रा 12 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है। हवा में कार्बन की मात्रा भी लगातार कम हो रही है। अब हवा में सल्फर ऑक्साइड की मात्रा 08 व नाइट्रोजनऑक्साइड की मात्रा 31 माइक्रो ग्राम घन मीटर दर्ज की गई है।
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की रफ्तार पहले के मुकाबले बढ़ी है।