अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सिविल अस्पताल की एंबुलेंस सेवाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि तीन महिलाओं को डिलीवरी की छुट्टी के बाद एंबुलेंस का घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान नवजात और जच्चा खुले में बैठे रहे। उन्हें ठंड से बचाने के बाद परिजनों को अपने स्तर पर इंतजाम करने पड़े। कई घंटे इंतजार के बाद एंबुलेंस आई। इसके बाद तीनों महिलाओं को एक साथ ले जाया गया।
परिजनों में अस्पताल प्रबंधन की अनदेखी पर रोष है। अस्पताल अधिकारियों ने मामले की जानकारी न होने की बात कही है।
शहर की नलवा कॉलोनी, नांगला पार और छोटूराम चौक निवासी तीन महिलाओं की डिलीवरी के बाद सोमवार को छुट्टी हुई थी। सभी को अस्पताल से दोपहर करीब 12 से डेढ़ बजे के बीच छुट्टी मिली। परिजन इस पर एंबुलेंस लेने नीचे आए, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। वे एंबुलेंस केंद्र पर पहुंचे तो वहां जल्द उपलब्ध कराने की बात कही गई। इसके बाद भी करीब तीन बजे एंबुलेंस पहुंची।
ठंड में बाहर ठिठुरते रहे जच्चा व बच्चा
नलवा कॉलोनी निवासी अनिल ने बताया कि उसने अपनी पत्नी रोशनी को डिलीवरी के लिए शनिवार को सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था। उसकी पत्नी ने जुड़वा लड़का और लड़की का जन्म दिया। अस्पताल से सोमवार दोपहर करीब एक बजे छुट्टी दे दी गई। वह उन्हें घर ले जाने के लिए एंबुलेंस लेने पहुंचा तो वह नहीं मिली। एंबुलेंस केंद्र पर पहुंचा तो बताया गया कि एक ही एंबुलेंस हैं। वह बार-बार केंद्र और डिलीवरी वार्ड के चक्कर लगाता रहा, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। उसे करीब ढाई बजे एंबुलेंस दी गई। इस दौरान दो अन्य महिलाएं भी डिलीवरी के बाद एंबुलेंस का इंतजार करती रहीं।
एक ही एंबुलेंस में तीन को ले जाया गया
परिजनों का आरोप है कि उनको सिविल अस्पताल परिसर में ही एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस चालक ने उन तीनों को एक ही बार में एंबुलेंस में बैठा लिया। उनको मजबूरीवश एक ही एंबुलेंस में बैठना पड़ा। नांगला पार निवासी महिला के परिजनों ने बताया कि उनको बाकी दोनों महिलाओं को घर छोड़कर आने के बाद छोड़ा गया।
तेल बचाने के चक्कर में बनाते हैं रूट
स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार महिला को डिलीवरी की सूचना पर घर से सिविल अस्पताल लेकर आना होता है। छुट्टी के बाद घर पर छोड़ना भी होता है। इसके लिए 102 नंबर है। बताया जा रहा है कि केंद्र के अधिकारी डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चों दोनों को तुरंत छोड़कर आने की बजाय उनके रूट बनाने लगते हैं। वे एक जच्चा और बच्चा को घर छोड़कर आने से बचते हैं। इसलिए कई बार जच्चा और बच्चा को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
महिलाओं को डिलीवरी के बाद छुट्टी मिलते ही एंबुलेंस मिल जानी चाहिए। सोमवार को तीन महिलाओं के एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं मंगलवार को जाकर मामले को देखता हूं। किसी तरह की लापरवाही मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
आलोक जैन, एमएस, सिविल अस्पताल पानीपत।