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लावारिस जुड़वा बच्चियों को गोद लेने दिल्ली से आए दंपति

Sat, 17 Sep 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,पानीपत
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लावारिस जुड़वा बच्चियों को गोद लेने दिल्ली से आए दंपति
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। लावारिस बच्चियों को अपनाने के लिए दिल्ली के दो दंपतियों ने अपनी बांहें फैला दी हैं। दोनों दंपति बच्चियों को गोद लेने के लिए सिविल शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे। इनके पास पहले से एक-एक बच्ची है। इन दंपतियों को देख डॉक्टरों के चेहरे पर भी खुशी झलकने लगी। डॉक्टरों ने सभी को गोद लेने की कागजी कार्रवाई करने की सलाह दी। डॉक्टर्स ने बताया कि दोनों बच्चियों और बच्चे की तबियत सामान्य है।
अस्पताल स्टाफ ने एक बच्ची का नाम नैंसी और दूसरी का प्रियांशी रख दिया है।

दिल्ली के उत्तम नगर और रोहिणी के सेक्टर-17 से दो दंपति नवजात बच्चियों को गोद लेने सिविल अस्पताल पहुंचे। एक दंपति का उत्तम नगर में स्पेयर पार्ट का कारोबार है, जबकि दूसरे दंपति का रोहिणी में रेस्टोरेंट है। दोनोें ने अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के इंचार्ज डॉ. दिनेश दहिया से बच्चियों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने दोनों को गोद लेने की इच्छा जाहिर की।
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दोनों दंपति ने बताया कि वह पहले सो एक-एक बेटी के माता-पिता हैं। वह चाहते है कि उनका घर बेटियों की किलकारियों से गूंजे।

दूसरी तरफ एसपी राजेश दुग्गल ने दोनों बच्चियों को सड़क किनारे छोड़ने वाली मां और पिता की तलाश के लिए तीन टीमें गठित कर दी हैं। तीनों टीमें पानीपत, करनाल, सोनीपत, दिल्ली, कैराना और शामली के अस्पतालों में दबिश दे रही हैं। विदित है कि बुधवार को सेक्टर 11 में एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के घर के बाहर दोनों बच्चियां लावारिस मिली थीं। दोनों बच्चियां एक टोकरी में थी और बच्चियों के पास पांच हजार रुपये नकद, ब्रेड के पैकेट रखे थे।
बच्चे की हालत भी सामान्य
सेक्टर-25 में एक पेट्रोल पंप के पास एक प्लॉट में मिले बच्चे की हालत भी फिलहाल सामान्य है। डॉक्टर बच्चे को लगातार तापमान और ऑक्सीजन दे रहे है। बच्चे का वजन भी सामान्य है।


दोनों बच्चियों की हालत सामान्य है। एक बच्ची को पीलिया था। फिलहाल वह पूरी तरह से स्वस्थ है। डॉक्टरों की टीम लगातार दोनों बच्चियों का ख्याल रख रही है। दिल्ली से दो दंपति बच्चियों को गोद लेने के लिए आए थे। उन्हें कानूनी प्रक्रिया पूर्ण करने की सलाह दी गई है।
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डॉ. दिनेश दहिया, बाल रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल पानीपत

बच्चों को गोद लेने के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन डाउन लोड करनी पड़ती है। इसमें दिए गए फार्म को भरना पड़ता है। आवेदन फार्म डीसीपीओ के पास जाता है। डीसीपीओ गोद लेने वाले दंपति के बारे में जानकारी लेता है। कानूनी मापदंडों की जांच करता है। उसके बाद ही बच्चे को गोद दिया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया में कई माह का वक्त लग जाता है।
सुमन सूद, चेयरपर्सन, बाल कल्याण समिति पानीपत।
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