अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। मुख्यमंत्री ने शहर की मांग पर बस स्टैंड शिफ्ट, किला मैदान पर पुलिस स्टेशन और फायर ब्रिगेड के बेड़े को मजबूत करने के लिए दो साल पहले पानीपत शहर में ही घोषणा की थी। तीनों में से एक भी घोषणा पूरी नहीं हो सकी है। शहरवासियों के लिए ये तीनों योजनाएं महत्वपूर्ण हैं। शहरी विधायक ने भी इनकी सिफारिश की थी। इसके साथ ही जिले में मुख्यमंत्री की अन्य दर्जनों घोषणाएं लटकी हुई हैं। लोगों की मांगों पर काम की स्पीड का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारी योजनाओं को जल्द ही मूर्त रूप देने का दावा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सत्ता में आने के बाद विधानसभा क्षेत्र स्तर पर जनसभा की थी। स्थानीय विधायक की मांग पर जनता के हित में घोषणाएं भी की थीं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्र में 28 जून 2015 को जनसभा की थी। इसमें पानीपत बस स्टैंड को शिफ्ट करने, किला मैदान पर पुलिस स्टेशन और फायर ब्रिगेड में गाड़ियों को बढ़ाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को चंडीगढ़ में इनके अलावा जिले की अन्य घोषणाओं की रिव्यू मीटिंग ली। इसमें विभागीय अधिकारियों के अलावा जिले के विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री की तीनों घोषणाओं की वास्तविक स्थिति की एक रिपोर्ट।
बस स्टैंड शिफ्टिंग को लेकर आज भी खींचतान
पानीपत बस स्टैंड को शिफ्ट करने की मांग लंबे समय से चल रही है। इसको लेकर घोषणा भी की जा रही हैं। शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने 28 जून 2015 को भी इसकी मांग की थी। मुख्यमंत्री ने बस स्टैंड हुडा सेक्टर-13-17 में शिफ्ट करने की घोषणा की थी, लेकिन यह प्रस्ताव अटक गया। पिछले साल इसे सिवाह गांव में शिफ्ट करने की घोषणा की गई। यह भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में उलझकर रह गई। बस स्टैंड आज भी कंडम बिल्डिंग में चल रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को इसको लेकर तकनीकी कमेटी गठित कर जल्द ही फैसला लेने का आदेश दिया।
किला मैदान पर नहीं बन सका पुलिस स्टेशन
शहरी विधायक ने किला मैदान पर पुलिस स्टेशन बनाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने रैली में ही इसकी घोषणा की थी। किला क्षेत्र अब थाना शहर के अंतर्गत आता है। इसको लेकर किला मैदान पर एक चौकी स्थापित की गई है, लेकिन एरिया बड़ा होने के चलते पुलिस समय पर नहीं पहुंच पाती और रात को गश्त भी ठीक से नहीं हो पा रही। इस वजह से चोरी और दूसरी आपराधिक वारदात बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
फायर ब्रिगेड का बेड़ा भी ढुलमुल
पानीपत में करीब दस हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। इसके अलावा करीब 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। शहरी विधायक ने फायर ब्रिगेड में गाड़ियों को बढ़ाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए ढाई करोड़ रुपये की घोषणा की थी। आज तक फायर ब्रिगेड का बेड़ा मजबूत नहीं हो सका है। फैक्ट्रियों में आग लगने के बाद एक गाड़ी से ही चक्कर लगाने पड़ते हैं या फिर रिफाइनरी और थर्मल की फायर ब्रिगेड का सहारा लेना पड़ता है। कई बार फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सूचना के तुरंत बाद नहीं पहुंच पातीं। बता दें कि इस समय दमकल विभाग में मात्र दस गाड़ियां हैं।
जिले के अन्य विस क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाओं की रिपोर्ट ली। यहां की थी स्थिति चिंताजनक बताई गई। परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्णलाल पंवार, ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा और समालखा विधायक रविंद्र मच्छरौली ने भी अपनी मांगों को रखा। बताया जा रहा है कि इन विधायक ने भी मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अपना-अपना पक्ष रखा। पानीपत ग्रामीण हलके में सबसे बड़ी घोषणा पानीपत शुगर मिल को डाहर में शिफ्ट करने की रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर भी जल्द ही काम शुरू कराने का भरोसा दिया।
चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लेकर विस्तार से बातचीत हुई है और इसमें सब विषयों को बारीकी से रखा गया है। पानीपत बस स्टैंड को लेकर तकनीकी टीम के गठन का फैसला लिया गया है और बाकी योजनाओं को भी अमलीजामा पहनाने में तेजी लाई जाएगी।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी पानीपत।