पानीपत। चातुर्मास वीरवार को शुरू हो गया। श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानक अग्रवाल मंडी, राजाखेड़ी और समालखा नई अनाज में चातुर्मास के दौरान प्रवचन किए।
श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानक अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में अरुण मुनि महाराज ने प्रवचन में कहा कि अपनी आलोचना करने व आध्यात्मिक विकास का पर्व है चौमासी।
जैनों के पर्व मानव जाति के विकास, उत्थान, कल्याण के लिए है। चातुर्मासिक चौमासी की हृदय से आराधना करने के अनेक लाभ है। यह दया का रिमझिम झरना है। अनादिकाल से यह पर्व चला आ रहा है।
भगवान महावीर तो चले गए परंतु अपनी चमक अपने मुनियों में छोड़ गए। सुनो रे भाइयों मेरे साथ गुनगुनाओं कि मेरे मालिक तेरी नौकरी, सबसे ऊंची है सबसे बड़ी तेरे दरबार की हाजिरी, सबसे ऊंची है सबसे बड़ी भगवान महावीर के दरबार की हाजिरी, सबसे ऊंची है सबसे बड़ी। सभी श्रावकों ने गुरु भक्ति से कहा कि गुरु पूर्णिमा तो वर्ष में एक बार आती है पर हमारे रहवर, योगिराज गुरुदेव का आशीर्वाद हर पल बरसता रहता है। गुरुदेव के गुणों का वर्णन करना मानों सूरज को दिया दिखाने के समान है, कोई कलम लेखनी गुरु गुणों की महिमा नहीं लिख सकती, गुरु गुणगान प्रशंसा में प्रत्येक शब्द बौना सा प्रतीत होगा।
गुरुदेव सभी को धर्म -अर्थ लक्ष्मी से भरपूर कर, सर्व सुखों से निहाल मालामाल कर देते हैं। इस अवसर पर गांधी मंडी से प्रधान जगदीश जैन, अंसल समाज से जगदीश जैन, अग्रवाल मंडी जैन सभा से गौतम जैन, जगदीश जैन, सुभाष जैन और राजेंद्र उपस्थित रहे।