पानीपत। महाशिवरात्रि बुधवार को है। महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक और पूजन को लेकर शहर समेत जिलेभर के शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। शहर के प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर का शिवालय, जगन्नाथ मंदिर का शिवालय, सेक्टर-12 स्थित सनातन धर्म मंदिर, असंध रोड स्थित शिव मंदिर और भादौड़ गांव स्थित प्रगटेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सभी शिवालयों में सुबह भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। फिर पूरा दिन भजन-कीर्तन किया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दिन शिव मंत्र का जाप करने से सफलता और समृद्धि का रास्ता खुल जाते हैं।
प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर के आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि महाशिवरात्रि वह रात्रि है, जिसका शिव तत्व से घनिष्ठ संबंध है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। शिवाचरण और जागरण ही इस व्रत की विशेषता है। जो इस व्रत को करता है वह शिव भगवान को प्रसन्न कर लेता है। ईशान-संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को भगवान शिव करोड़ों सूर्यो के समान प्रभा वाले लिंग रुप में प्रकट हुए थे। शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा का महत्व अधिक है। भगवान शिव की पूजा, शिव के लिए उपासना, शिव मंत्र का जाप और काशी में देह त्याग भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव मंत्र जाप करने से जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। पंचामृत से भगवान शिव का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। इससे व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है।
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कल सुबह बन रहा चतुर्ग्रही योग
आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि महाशिवरात्रि के अगले दिन ही अल सुबह वीरवार को 4:37 पर चतुर्ग्रही योग बना रहा है। इस योग में सूर्य, चंद्रमा, बुध और शनि मिलते है जिससे विशेष योग बनता है। इस योग के समय शिव मंत्र का जाप व उपासना करने से व्यक्ति की मनोकामना जल्दी पूर्ण होती है। उसे कार्य में सफलता मिलती है।