फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। दिगंबर जैन मंदिरों में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रात: सभी सातों मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा और पूजन विधान के पश्चात भगवान ऋषभदेव को निर्वाण लाडू समर्पित किए गए।
विज्ञापन

श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि विशेष रूप श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर हुडा के मूलनायक आदिनाथ भगवान का मस्तकाभिषेक व शांति धारा की। तत्पश्चात भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। मुख्य निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य राकेश जैन और रचना जैन पानीपत को मिला। इसके पश्चात पानीपत में प्रथम बार 21 मंडलों द्वारा भक्तामर दीप अर्चना संपन्न हुई। जिसमें 1008 दीपक भक्तामर के 48 काव्य को पढ़ाते हुए प्रज्ज्वलित किया। पूरे विश्व की शांति की मंगल कामना की गई

अधिवक्ता मेहुल जैन ने बताया कि भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के पहले तीर्थंकर हैं। उन्हें आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है। ऋषभदेव ने अहिंसा, संयम, और तप के उपदेश दिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति को कृषि, विद्या, असि, मसि, वाणिज्य, और शिल्प जैसी चीज दी। ऋषभदेव के जीवन से जुड़ी जानकारी आचार्य जिनसेन के आदि पुराण में मिलती है। भागवत पुराण में ऋषभदेव को भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक माना गया है। जैन ग्रंथों के अनुसार लगभग एक हजार वर्ष तक तप करने के पश्चात ऋषभदेव को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। भगवान ऋषभदेव ने माघ चतुर्दशी कृष्ण को कैलाश पर्वत से मोक्ष को प्राप्त किया। वैदिक दर्शन में अथर्ववेद व अग्नि पुराण, मार्कंडेय पुराण और भी बहुत सारे ग्रंथों में ऋषभदेव जी का वर्णन आता है। वैदिक दर्शन में ऋषभदेव एक महान राजा और महापुरुष व राजा नाभि और मरुदेवी के महान पुत्र व प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत जिनके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें