फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन के बाद तुर्की का कारपेट बना पानीपत के लिए चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व बाजार में तुर्की का सस्ता कारपेट पानीपत के कारपेट उद्योग के लिए चुनौती बनता जा रहा है। पहले चीन का कारपेट पानीपत के लिए चुनौती था अब तुर्की में बना कारपेट मशीन से बनने के कारण सस्ता पड़ रहा है। भारत में बना हैंडमेड कारपेट उससे महंगा है। इसलिए मशीन से बने कारपेट की मांग अधिक है। अमेरिका और चीन के व्यापार ने भी भारतीय कारपेट उद्योगों को प्रभावित किया है। अमेरिका ने आयात ड्यूटी बढ़ाने के बाद नवंबर तक चीन को अपने पुराने ऑर्डर निपटाने की अनुमति दी है। जिससे अमेरिका में भारतीय कारपेट की मांग में कमी आई है। इसको लेकर पानीपत के कारपेट उद्यमी चिंतित है। ऐसे में उद्यमियों का कहना है कि कारपेट उद्योग का अस्तित्व बचाने के लिए सिरे से सरकार को उद्यमियों की ओर ध्यान देना होगा।
विज्ञापन

तुर्की के कारपेट मार्केट में आने से पहले भारतीय कारपेट को मात्र चीन से ही चुनौती मिलती थी। अब तुर्की के सस्ते मशीनी कारपेट से भी चुनौती रही है। यहां बेल्जियम व जर्मनी की बनी मशीनों से कारपेट तैयार किया जा रहा है। इससे कम समय पर अधिक उत्पादन होता है। मशीन से कारपेट पर कम समय में विभिन्न प्रकार के डिजाइन प्रोसेस होते हैं। भारत में हाथ से कारपेट बनाने में तीन चार दिन लग जाते हैं। जबकि मशीन से एक दिन में कई हजार मीटर कारपेट तैयार हो जाता है।
पानीपत से दो हजार करोड़ से अधिक का कारपेट निर्यात
पानीपत से दो हजार करोड़ से अधिक का कारपेट निर्यात हो रहा है। यहां पर 150 उद्योग लगे हुए हैं। मशीनी कारपेट 30 से 40 रुपये प्रति फुट पड़ता है। जबकि हाथों से बना कारपेट 125 रुपये फीट पड़ता है। इसलिए भारत का कारपेट तुर्की व चीन से तीन गुना महंगा पड़ता है। पानीपत के 90 प्रतिशत उद्योगों में हाथ से कारपेट बनते हैं।
विज्ञापन

35-40 फीसद मांग हुई कम
कारपेट एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सत्येंद्र ने बताया कि कारपेट की मांग में 35-40 फीसद की कमी दर्ज की गई है। सरकार को यहां के उद्योगों को बचाने के लिए मशीनें सस्ती दरों अथवा कम ब्याज पर उपलब्ध करवानी होगी। पानीपत में लिबर्टी व राज ओवरसीज में ही मशीनों से कारपेट बनता है। दो से ढाई करोड़ रुपये की मशीनरी आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें