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Panipat News: चुलकाना धाम श्राइन बोर्ड बनाने की कैबिनेट की मुहर, गांव में उड़े आबिर और गुलाल

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चुलकाना गांव में झूमते ग्रामीण। स्रोत : सोशल मीडिया
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समालखा। चुलकाना धाम को श्राइन बोर्ड बनाने पर प्रदेश की कैबिनेट ने भी मुहर लगा दी है। पांचवें दिन सोमवार को भी गांव में खुशी से आबिर और गुलाल उड़ा। ग्रामीणों ने इसे भक्तों और ग्रामीणों की जीत बताई। कैबिनेट ने यह मुहर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के पांचवें दिन लगाई है। अब कमेटी की जगह श्राइन बोर्ड काम करेगा। यह देश का पहला श्री श्याम बाबा का मंदिर है जिसको श्राइन बोर्ड बनाया गया है।
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हरियाणा सरकार की कैबिनेट की चंडीगढ़ में बैठक के दौरान चुलकाना धाम श्री श्याम बाबा मंदिर को श्राइन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा। कैबिनेट से इसे तुरंत पास कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही ग्रामीणों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने चुलकाना धाम पर खुशी मनाई। ग्रामीणों ने सोमवार को भी लड्डू बांटे। ग्राम पंचायत सरपंच सतीश छौक्कर ने बताया कि बोर्ड बनाकर भक्तों की व्यवस्था के लिए कदम उठाया जाएगा। ग्राम पंचायत बोर्ड का पूरा सहयोग करेगी।
श्याम बाबा की यह है कहानी
श्री श्याम बाबा के शीश का दान महाभारत के युद्ध में हुआ था। तभी से इस धाम का महत्व बढ़ गया। इस धाम की मान्यता सतयुग से चुनकट ऋषि के नाम से जुड़ी हुई है। फाल्गुन के महीने की एकादशी और द्वादशी पर विशाल मेला लगता है। इसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। वहीं हर महीने एकादशी और द्वादशी के अलावा रविवार और अन्य त्योहारों पर श्रद्धालु दर्शन करने को आते हैं।
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कमेटी कुछ लोगों तक होती है सीमित
चुलकाना धाम में श्री श्याम बाबा सेवा समिति काम करती थी। इसके प्रधान रोशनलाल छौक्कर हैं। वहीं पानीपत के कुछ लोग इसको संभालते हैं। कमेटी लेखा जोखा पूरा रखने का दावा करती है। पिछले सप्ताह ही बैठक में हंगामा भी हो गया था। ऐसे में बैठक स्थगित कर दी थी। ग्रामीणों का आरोप रहा है कि कुछ लोगों में ही मंदिर की व्यवस्था रह जाती है। इसका विस्तार किया जाना चाहिए। ग्रामीणों की मांग पर सरकार ने जनवरी महीने में चुलकाना धाम को श्राइन बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। हाईकोर्ट में 14 मई को दोनों पक्षों ने श्राइन बोर्ड बनाने पर सहमति जताई थी।
श्राइन बोर्ड में सीईओ और प्रशासन की होती है देखरेख
श्राइन बोर्ड का प्रशासनिक ढांचा होता है। राज्यपाल बोर्ड के मुख्य अध्यक्ष होते हैं। अध्यक्ष समाज के संस्कृति, प्रशासन और धर्म के नौ से 10 प्रतिष्ठित नागरिकों को बोर्ड का सदस्य नामित करते हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी बोर्ड के नीतिगत फैसलों को धरातल पर लागू करते हैं। अधिकारी यात्रा और पंजीकरण प्रबंधन समेत तमाम व्यवस्था देखते हैं। सुविधा के साथ आवास और भोजन की व्यवस्था देखते हैं। इसके साथ स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवा भी बोर्ड ही देखता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का चढ़ावा, दान और डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली राशि सीधे श्राइन बोर्ड के खाते में जाती है। पैसे का इस्तेमाल मंदिर के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने में किया जाता है। श्राइन बोर्ड इस फंड से स्थानीय स्तर पर गुरुकुल, अस्पताल, आपदा कोष और महिलाओं व स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को रोजगार देकर सामाजिक विकास का काम भी करता है।

चुलकाना गांव में झूमते ग्रामीण। स्रोत : सोशल मीडिया

चुलकाना गांव में झूमते ग्रामीण। स्रोत : सोशल मीडिया

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