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नुकसान से उबरने की राह पर टेक्सटाइल नगरी

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पानीपत। करीब 90 हजार करोड़ की घरेलू व 40 हजार करोड़ का सालाना एक्सपोर्ट करने वाली टेक्सटाइल नगरी अब लॉकडाउन के नुकसान से उबरने की कोशिश कर रही है। 30 प्रतिशत लेबर वापस पानीपत लौट चुके हैं। उद्यमियों ने अधिकतर लेेबर को अपने खर्च पर वापस बुला लिया है। जुलाई के पहले सप्ताह तक सारे लेबर लौट आने की उम्मीद है। काम फिर से रफ्तार पकड़े, इसके लिए बजट का भी संकट है। दरअसल, लॉकडाउन के कारण घरेलू मार्केट बंद रही इसलिए माल नहीं बिका और उद्यमियों की पेमेंट रुक गई। 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। दिक्कतों के बावजूद उद्यमियों में जोश है। नए 25 कंबल प्लांट लगाने की भी तैयारियां चल रही है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या मशीनों का आयात रुकना है।
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लॉकडाउन के कारण चीन और दक्षिण कोरिया में मशीनों का आयात रुक गया था। कई बड़े प्रोजेक्ट भी अटके हुए हैं। लॉकडाउन में घरेलू मार्केट बंद रहने से देश के विभिन्न हिस्सों में उद्यमियों की 15 हजार करोड़ से अधिक पेमेंट रुकी हुई है। दरअसल, दुकानदारों ने लॉकडाउन से पहले माल उठा लिया था। लॉकडाउन लगने के बाद दुकानें बंद रहीं और माल नहीं बिका। दुकानदार माल बेचने के बाद उद्यमियों की पेमेंट करते हैं और ये चक्र ऐसे ही चलता रहता है। अब उद्यमी पेमेंट के लिए दुकानदारों का माल बिकने का इंतजार कर रहे हैं।
विदेशों में उत्पाद बिकने का सीजन चला गया, माल देरी से पहुंचा
पानीपत का माल लगभग 110 देशों में जाता है। जर्मनी इंग्लैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, अर्जेंटीना और इटली पानीपत के माल की सबसे बड़ी मंडी है। वहां पर टेक्सटाइल उत्पादों के बड़े बड़े शोरूम हैं। उद्यमी लॉकडाउन के कारण समय पर माल की आपूर्ति नहीं करवा पाए। वहां पर सीजन चला गया। इसलिए विदेशों से लगभग आठ हजार करोड़ रुपये की बकाया पेमेंट का इंतजार किया जा रहा है।
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रंगीन धागा बनाने में पानीपत नंबर वन
रंगीन धागे के उत्पादन में पानीपत ने कीर्तिमान स्थापित किया है। पानीपत ने इसके उत्पादन में इटली को पछाड़ा है। जर्मनी की मशीनों से हर दिन पानीपत में 30 लाख किलोग्राम धागे का उत्पादन हो रहा है। अब पानीपत के धागे से विदेशों में टी शर्ट व शर्ट भी बन रही है। ये पानीपत के लिए गौरव की बात है।
लॉकडाउन के कारण मशीनरी नहीं आ पाई। रॉ मैटेरियल महंगा हो गया। लेबर वापस चले गए थे। अत्यधिक उद्योग सही नहीं चल पाए। पेमेंट फंस गई। उद्यमी चारों ओर से घिर गए थे। पिछले लॉकडाउन के बाद भी उद्यमी दोबारा खड़े हो गए थे। इस बार भी खड़े होंगे। नए कंबल प्लांट पानीपत में लगेंगे । चीन से कई बड़े प्रोजेक्ट भी आने की उम्मीद है। -प्रीतम सिंह सचदेवा, प्रधान, इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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