पानीपत। कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार रूट पर लगी रोडवेज बसें लौट आई हैं। इन्हें लोकल मार्गों पर चलाया गया है। सावन महीने के शुरू होते ही हरिद्वार में कांवड़ मेला शुरू हो जाता है। प्रदेश के साथ राजस्थान से कांवड़ लाने वाले श्रद्धालु पानीपत से होकर हरिद्वार जाते हैं। पानीपत डिपो से सामान्य दिनों में 12 और दूसरे डिपो की आठ बसें हरिद्वार जाती हैं।
पानीपत डिपो अधिकारियों ने 15 बसों के अतिरिक्त परमिट हरिद्वार के लिए थे। इन बसों को 13 जुलाई को हरिद्वार के लिए चलाया गया था। पानीपत डिपो से तड़के पांच बजे पहली बस जाती हैं। उस समय भी यात्री डिपो पर पहुंच जाते हैं। शनिवार को हरिद्वार के लिए यात्री कम पहुंचे। ऐसे में सामान्य दिनों में चलने वाली बस पर्याप्त रही।
डिपो अधिकारियों को अतिरिक्त बसों का सहारा नहीं लेना पड़ा। इन बसों को लोकल या दूसरे रूटों पर चलाया गया है। हरिद्वार का मेला दो चरणों में चलता है। पहला चरण सावन महीने के शुरू होते ही कांवड़ियों का रहता है। ज्यादातर कांवड़िये हरिद्वार के लिए बसों का प्रयोग करते हैं। अब डाक और मोटरसाइकिल कांवड़ का प्रचलन भी बढ़ गया है। ऐसे में बसों की मांग कम हुई है। शिवरात्रि से पहले दिन फिर से मांग बढ़ेगी। पहले चरण में शिवरात्रि तक बसों की मांग रहती है। इसके बाद सावन की पूर्णिमा पर गंगा में स्नान होता है। दूसरे चरण में तब बसों की मांग होती है। श्रद्धालु उस समय हरिद्वार गंगा स्नान करने जाते हैं।