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Panipat: गेहूं की कटाई के लिए सीमा विवाद, हरियाणा और यूपी के किसानों में टकराव; क्या बोला प्रशासन?

Thu, 16 Apr 2026 11:10 PM IST
शाहिल शर्मा माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत

सार

रिशपुर गांव और यूपी के मवी गांव के किसान की फसल कटाई के लिए दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। फसल काटे जाने के बाद सरसों की फसल के लिए भी दोनों प्रदेशों के किसानों में टकराव की स्थिति नजर आ रही है।
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यूपी और हरियाणा के किसानों में जमीनी विवाद - फोटो : AI
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विस्तार
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यमुना नदी के अंदर हरियाणा-यूपी के किसानों की गेहूं की फसल कटाई के लिए यमुना भूमि सीमा पर जमीन विवाद एक बार खड़ा हो गया है। रिशपुर गांव और यूपी के मवी गांव के किसान की फसल कटाई के लिए दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। फसल काटे जाने के बाद सरसों की फसल के लिए भी दोनों प्रदेशों के किसानों में टकराव की स्थिति नजर आ रही है। इसके बाद यूपी पार कैराना प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। यूपी टीम ने किसानों को हरियाणा प्र‎शासन से मिल कर बैठक कर हल करने का आश्वासन दिया। 
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कैराना क्षेत्र के मवी गांव निवासी किसान रमेश मलिक ने बताया कि उनकी करीब 35 बीघा जमीन यमुना पार हरियाणा के रिशपुर गांव से सटी हुई है। इसमें 25 बीघा में गेहूं और 10 बीघा में सरसों की फसल उगा रखी है। आरोप है कि दो दिन पहले रिशपुर के कुछ लोग उनकी 25 बीघा गेहूं की फसल काटकर ले गए। 
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इसके बाद किसान ने मामले की शिकायत एसपी और एसडीएम कैराना से की थी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उनकी सरसों की फसल को कटने से बचा लिया। एसडीएम कैराना निधि भारद्वाज के निर्देश पर नायब तहसीलदार सतीश कुमार यादव राजस्व टीम और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान हरियाणा पक्ष के लोग और वहां की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। यूपी प्रशासन जमीन को मवी गांव निवासी किसान की बता रहा था जबकि हरियाणा के रिशपुर के किसान उसे अपनी जमीन बता रहे थे। दोनों पक्षों के बीच सहमति न बनने पर प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा। 

नायब तहसीलदार ने बताया कि मामला दोनों राज्यों के बीच का है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों के स्तर पर बैठक के बाद ही इसका स्थायी समाधान निकाला जाएगा। विवादित भूमि के लिए दोनों राज्यों के किसानों में तनाव बना हुआ है। यमुना के अंदर दोनों गांवों के किसानों का आपस में कई बार भूमि पर कब्जा कर खेती काटने को लेकर चार-पांच बार खूनी संघर्ष हो चुका है। दोनों ओर के किसानों के दोनों राज्यों के पुलिस थानों में मामले दर्ज भी हो चुके हैं और अदालत में भी केस विचाराधीन है।
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