पानीपत। श्री एसएस जैन सभा गांधी मंडी में अनुपम मुनि महाराज के सानिध्य में तप अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ संरक्षक महावीर प्रसाद जैन, ओमप्रकाश जैन, रणवीर सिंह मलिक और सुदेश जैन का उनकी सुदीर्घ तपस्या के लिए जैन समाज की ओर से अभिनंदन किया गया।
अनुपम मुनि महाराज ने कहा कि जैन धर्म का मूलाधार अहिंसा है। दान, शील, तप व भावना मोक्ष प्राप्ति के मूल मार्ग हैं। शुद्ध मन से तपस्या करने से मोक्ष में रुकावट संसार में भटकाने वाली कर्म बीमारी कट जाती है।
सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने कह कि आगम वाणी कहती है कि सम्यक तप करने से आत्मा शुद्ध होती है। इससे विकारों व विचारों का शोधन होता है। चातुर्मास संपूर्ति दिवस है। आज के दिन सभी संत-सतियां महाराज अपने-अपने चातुर्मास संपूर्ण कर विहार कर देंगे।
वरिष्ठ संरक्षक भगत महावीर प्रसाद जैन गत पांच वर्षों से लगातार एक दिन निर्जल व्रत व एक दिन एकलठाणा तप कर रहे हैं। वे अनुपम मुनि महाराज सहित 21 साधु-साध्वियों के धर्म पिता हैं। अपनी आय का अधिकांश भाग दान-पुण्य में लगाने वाले चार खंदधारी सुश्रावक हैं।
ओमप्रकाश जैन ने इस बार 15 पोषध व्रत की तपस्या की है। पौषध में तपस्वी जैन स्थानक में ही रहकर एक तरह से 24 घंटे साधु के रूप में ही रहते हुए मात्र ठंडा किए गए उबले पानी को ही ग्रहण करते हैं।
वे इससे पहले भी पोषध व्रत की लगभग 20 अठाइयां कर चुके हैं। सुदेश रानी ने 45 आयंबिल व्रत की उपासना की है। जिसमें नमक, मीठा, दूध, दही, घी, सब्जी-फल व किसी भी रस वाली वस्तु का सेवन नहीं किया।
वे तपस्वी रघुनाथ मुनि की सुपुत्री और साध्वी सुबोध प्रभा, साध्वी रजत व साध्वी रतन की बहन हैं। रणवीर सिंह मलिक जैन ने 43 दिन की आयंबिल व्रत की तपस्या संपूर्ण की है। वे अब जैन धर्म में पूरी तरह रच-बस गए हैं। इस अवसर पर कृष्ण जैन, कालू जैन, रामनिवास, सुरेश, वरिंदर आदि मौजूद रहे।