हरियाणा के जिले कैथल में बासमती धान ने वीरवार को इतिहास रचते हुए इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 5103 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचा।
जानकारों के मुताबिक चावल इतिहास का यह एक रिकॉर्ड है वहीं इसी ग्रुप की 1121 ने भी 4000 हजार के आंकड़े को छूते हुए 4100 रुपये तक में बिक कर किसानों के वारे-न्यारे करवा दिए।
बासमती ग्रुप में रोजाना 200 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के उछाल से कई निर्यातक तो सिर पकड़ कर बैठने को मजबूर हैं। वहीं कई निर्यातक पहली बार किसानों को सीधा मिल रहे लाभ को लेकर खुश हैं। तो कईयों को भविष्य की चिंता भी सता रही है।
परंपरागत बासमती इस सीजन में पहली बार वीरवार को जब मंडी में पहुंची तो तरावड़ी में 5 हजार को पार करते हुए बासमती धान 5 हजार 103 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया।
कुरुक्षेत्र में 4600 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया। जानकारों का कहना है कि धान की इतनी कीमतें उन्होंने कभी नहीं देखीं और न ही सुनीं। चार दिनों से लगातार 200 से 400 रुपये का उछाल ले रही धान की 1121 किस्म 4000 रुपये पर पहुंच गई।
कैथल में अधिकतम यह 3900 से ज्यादा बिकी। यह धान बुधवार को 3700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी। निर्यात होने वाले धान की इतनी ज्यादा कीमत किसानों को इससे पहले नहीं मिल पाई।
इस तरह से बासमती एक एकड़ से किसानों को 90 हजार से 1 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है।
चावल निर्यातक विष्णु मित्तल के मुताबिक बीते सीजन में किसानों से हुई खरीद के बाद निर्यातकों को व्यापारियों से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक धान की खरीद करनी पड़ी थी।
किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया था। अधिकतर निर्यातकों के पिछले सौदों के तहत मिले ऑर्डर अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। वहीं डॉलर में भी तेजी है। इसके साथ-साथ विदेशों में मांग भी बढ़ी है।
कई कारणों से सीजन में ही निर्यातक सीधा खरीद कर रहे हैं। उनकी जानकारी में इतिहास में पहली बार किसानों को 5103 रुपये प्रति क्विंटल बासमती, 4100 रुपये प्रति क्विंटल 1121, 3700 रुपये प्रति क्विंटल मूच्छल, 2300 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल सरबती, 3100 रुपये प्रति क्विंटल सुगंधा बिक रही है। दीपावली के बाद तक यह तेजी रहने की उम्मीद है। इसके बाद भी ज्यादा मंदा नहीं आएगा। क्योंकि विदेशों में अभी लगातार मांग बढ़ रही है।
कैथल में दशकों से मिल चला रहे और अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अश्वनी शोरेवाला के मुताबिक धान की कीमतें उनकी समझ से परे हैं।
पिछले सौदों को पूरा करने, भविष्य में तेजी की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मांग के कारण ये अनाप-शनाप रेट चल रहे हैं।
सीजन में पहली बार धान की इतनी कीमतें देखी हैं। इसका जहां कुछ लोगों को फायदा होगा, वहीं कई राइस मिल और निर्यातकों के काम धंधों पर ताला भी लग सकता है।
किसानों को पहली बार मिला सीधा लाभ
निर्यातक विष्णु के मुताबिक पिछले सीजन में सीजन के बाद उन्हें महंगे दामों पर चावल खरीद कर 1000 से लेकर 1350 डॉलर तक प्रति टन विदेशों में बेचा था।
इस बार भी अब तक अधिकतम यह 1350 डॉलर ही पहुंचा है। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि अब की बार सीधा लाभ किसान को मिल रहा है। जो संतोष की बात है।
लेकिन इसमें नुकसान उन निर्यातकों का है जिन्होंने पिछली बार 1100 डॉलर के आसपास सौदे किए थे। उन्हें अब पिछले ऑर्डर पूरा करने के लिए 1300 डॉलर तक में यह खरीदना पड़ रहा है। लेकिन विदेशों में मांग में कोई कमी नहीं आएगी।
ऑल इंडिया चावल निर्यातक एसोएिशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के मुताबिक अच्छी गुणवत्ता का चावल इस बार कम है। पिछले साल चावल उद्योग कुछ हद तक लाभ में रहा था।
इस कारण मार्केट में तेजी है। 40 वर्ष के उनके अब तक के तजुर्बे में किसानों को 5100 रुपये का रेट आज तक नहीं मिला है। कहां तक रेट जाएगा, यह केवल भगवान ही जानते हैं।
बीते सीजन में बासमती धान के रेट
2012 2500 से शुरू होकर 3200 रुपये तक
2011 1600 से शुरू होकर 2200 रुपये तक
2010 2500 से शुरू होकर 3300 रुपये तक
2009 3000 रुपये से शुरू होकर 3500 तक
2008 2200 से शुरू होकर 2500 रुपये तक प्रति क्विंटल