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बैंकों की हड़ताल उपभोक्ताओं पर पड़ी भारी

Thu, 04 Jun 2015 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पांच सहयोगी बैंकों की एक दिन की हड़ताल उपभोक्ताओं पर भारी पड़ गई और इन बैंकों की करीब तेरह शाखाएं बंद होने से जिले का करीब सौ करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। उपभोक्ताओं को लेन-देन के लिए इधर-उधर के चक्कर काटने पड़े। बैंक यूनियन ने एसबीआई की नीतियों को सौतेली बताया और मांगों के लागू होने तक संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है। यूनियन ने इसी माह की 24 जून को फिर से हड़ताल पर जाने की धमकी दी है।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोगी पांच बैंकों की यूनियन ने बृहस्पतिवार  को हड़ताल कर दी और सेक्टर-25 स्थित रीजनल कार्यालय पर एसबीआई की नीतियों के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। इस मौके पर संयुक्त सचिव सीके अग्रवाल, जिला सचिव नरेंद्र कुमार, कामरेड विनोद कुमार, केंद्रीय कमेटी सचिव रामचंद्र चंदा मौजूद रहे।

करीब सौ करोड़ का लेन-देन प्रभावित
एसबीआई के सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ तरावनकौर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर व स्टेट बैंक ऑफ मैसूर के कर्मी बृहस्पतिवार को हड़ताल पर रहे। इन बैंकों की जिले में करीब 13 शाखाएं हैं और दिनभर किसी भी बैंक की शाखा में लेन-देन नहीं हुआ। बैंक यूनियन का दावा है कि जिले में एक दिन की हड़ताल के चलते करीब सौ करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।
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बैंकों पर ताले लटके देख रह गए हैरान
बैंकों पर ताले लटके पाकर उपभोक्ता परेशान हो गए। कुछ उपभोक्ता उल्टे पांव अपने गंतव्य को चले गए और कई उपभोक्ताओं ने दूसरे बैंकों की तरफ रुख किया जिसके चलते उनको दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एसबीआई से पृथक होने समेत आठ मांग रखीं
यूनियन ने एसबीआई से अलग होने समेत आठ मांगों को रखा। यूनियन ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इन बैंकों को पृथक करें। ट्रेड यूनियनों के अधिकारों का हनन बंद किया जाए। स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में यूनियन पर हो रहे प्रहार को बंद किया जाए। कर्मचारियों की गृह ऋण की सीमा बढ़ाई जाए। अधीनस्थ व अंशकालीन कर्मचारियों की भर्ती की जाए। यूनियन की पूर्वकालीन मांगों को माना जाए। एसबीआई की सर्विस कंडीशन और कॅरियर प्रोगेशन पॉलिसी को सहयोगी बैंकों के कर्मचारियों न थोपा जाए।
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