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एक हजार करोड़ से 1500 करोड़ पहुंचा लेन-देन, फिर भी नहीं राहत

Sun, 04 Dec 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत। नोटबंदी की घोषणा होने के बाद जिले के बैंकों में कैश का लेन-देन प्रतिदिन पांच सौ करोड़ रुपये बढ़ गया है। बावजूद इसके लोगों को कैश को लेकर राहत नहीं मिल पा रही है। शहर के लोग आज भी कैश को लेकर बैंकों व एटीएम के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़े हैं। रविवार को भी मॉडल टाउन स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में कैश को लेकर मार धाड़ मची रही, वहीं जीटी रोड बेल्ट पर खुले दो एटीएम पर लंबी लाइन लगी रही। बैंक अधिकारी भी कैश देने की बजाय कैशलेस पर जोर देने लगे हैं। लोग आज भी कैशलेस की बजाय कैश को अपनाने में लगे हुए हैं।
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नोटबंदी के 26वें दिन भी रविवार को खुले मॉडल टाउन स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में सुबह ही मारधाड़ मच गई। एक पूर्व सैनिक बैंक में पुरानी करेंसी के एक लाख रुपये जमा कराने आया तो बैंक अधिकारियों ने उसकी मोटी रकम जमा कराने से मना कर दिया। पूर्व सैनिक ने इस पर रोष प्रकट किया। इसको लेकर बैंक के बाहर काफी देर तक हंगामा मचा रहा। कुछ अन्य लोगों ने भी उसका समर्थन किया। वहीं जीटी रोड स्थित विजया बैंक के एटीएम पर कैश निकलवाने वालों की लाइन लगी रही। एक पुलिसकर्मी ने कई बार पैसे निकलवा लिए, इस पर लाइन में खड़े लोग भड़क गए। वहीं एक अन्य बैंक के एटीएम पर भी इसी तरह से लाइन लगी रही। रविवार होने पर अन्य बैंकों के एटीएम पर ताले लटके रहे। जिसके चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पहले सामान्य एक हजार तो अब 15 सौ करोड़ का लेन-देन
औद्योगिक नगरी होने के चलते जिले के बैंकों में लेन-देन अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा है। पहले सामान्यत एक हजार करोड़ प्रतिदिन का बैंकों में लेन-देन होता था।  नोटबंदी के बाद जिले के बैंकों में प्रतिदिन का लेन-देन करीब 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सबसे मोटा लेन-देन औद्योगिक इकाइयों में होता है। वहीं कैश ट्रांजेक्शन वालों की भी भीड़ लगी हुई है। आरबीआई द्वारा भी अब कम ही कैश दिया जा रहा है। आरबीआई का कहना है कि अब लोगों को कैश नहीं कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनानी चाहिए।
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बैंक अधिकारी नोटों से सिक्कों पर आए
बैंकों में कैश की आए दिन कमी होने के कारण बैंक अधिकारी भी नोटों की बजाय सिक्के देने पर आ गए हैं। बैंकों की स्थिति आए दिन अच्छी होनी की बजाय नीचे गिरती जा रही है। इसके चलते ही कई बैंकों ने दस के सिक्के बांट रहे हैं। दस के सिक्कों की एक हजार की थैलियां बनाकर जिले के लोगों को दी जा रही हैं। वहीं कुछ लोगों का मन हल्का करने के लिए एक-एक हजार का पैकेट भी साथ में दे दिया जाता है।

लोगों को परेशानी का करना पड़ रहा है सामना
लोगों को पैसे न मिलने के चलते पारिवारिक परेशानियों व अन्य कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक में पैसा आने के बाद भी लोगों को पर्याप्त पैसा नहीं दिया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी शादियों वाले घरों को हो रही है। अब शादियों वाले परिवारों को भी पैसे कम ही दिए जा रहे हैं। अब पैसे किसको और क्यों दिए जा रहे हैं, यह सवाल बैंक अधिकारी करने लगे हैं। अगर किसी को हलवाई के पैसे देने हैं तो हलवाई से बैंक में खाता न होने की लिखवाना पड़ता है। उसके बाद ही कैश दिया जाता है।

वर्जन
जिले में कैश की बहुत दिक्कतें सामने आ रही हैं। यह मुझे पता है। लेकिन लोगों को कैश से कैशलेस की ओर लेकर जाना है। इसके लिए थोड़ी ज्यादा परेशानी अगर उठानी पड़े तो उठा लेनी चाहिए।
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राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।
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