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Panipat News: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जयंती योग का शुभ संयोग

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पानीपत। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार जयंती योग का शुभ संयोग होगा। उस दिन रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में होना बेहद ही शुभ और फलदायी रहेगा। यही संयोग श्रीकृष्ण के जन्म के समय बना था। साधु सन्यासी और गृहस्थ सभी एक ही दिन भगवान कृष्ण की भक्ति उपासना कर पाएंगे।
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गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ रामराज कौशिक ने बताया कि हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के मन में संशय बना हुआ था। इस बार 26 और 27 अगस्त को लेकर कुछ संशय बना था। जन्माष्टमी का पर्व इस बार देशभर में 26 अगस्त सोमवार के दिन मनाया जाएगा। इस बार जन्माष्टमी पर जयंती योग का शुभ संयोग बना हुआ है। ऐसे में सबसे शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना करने से भक्तों को भगवान कृष्ण की विशेष कृपा मिलने वाली है। इस बार जन्माष्टमी पर बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं। ऐसे योग भगवान कृष्ण के जन्म के समय बने थे, वैसे ही योग इस बार भी बन रहे हैं। इस बार के शुभ योग में व्रत रखने से भक्तों को व्रत को चार गुना अधिक फल मिलने वाला है।


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जन्माष्टमी पर बने हैं बेहद शुभ योग
पंचांग की गणना बता रही है कि 26 अगस्त सोमवार के दिन अष्टमी तिथि सुबह 3:40 बजे प्रारंभ होगी। यह रात को 2:20 बजे तक रहेगी। जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र दोपहर में 3:55 बजे से आरंभ होगा और 27 की मध्य रात्रि 3:38 बजे तक तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में होंगे। गणना के अनुसार जन्माष्टमी सोमवार या बुधवार को होती है तो यह बहुत ही दुर्लभ संयोग बनाता है। बुधवार और सोमवार को जन्माष्टमी होने पर जयंती योग का शुभ संयोग बनता है। जिसे जयंती योग भी कहते हैं। दरअसल, जिस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, उस दिन बुधवार था। ठीक इससे छह दिन बाद यानी सोमवार को भगवान कृष्ण का नामकरण आदि कार्य किए गए थे। इसलिए जन्माष्टमी सोमवार या बुधवार में होना बेहद शुभ मानी जाती है।
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