जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। देशबंधु गुप्ता राजकीय कॉलेज में इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर दलजीत कुमार का पर्यावरण के प्रति अनोखा प्रेम बन गया। वे कॉलेज में हर्बल बोटेनिकल गार्डन और पक्षी विहार बना चुके हैं। इसी के साथ शहर ही नहीं जिले और प्रदेश के कई शहरों व कॉलेजों में हर्बल पार्क विकसित कर चुके हैं। करीब एक दर्जन अभियान चलाकर करीब 70 हजार पौधे प्रदेशभर में बांट चुके हैं। करीब 28 स्थानों पर हर्बल पार्क बना चुके है। उनको लोग ग्रीनमैन के नाम से भी जानते हैं।
सहायक प्रोफेसर दलजीत कुमार ने बताया कि उन्होंने 2014 में राजकीय कॉलेज इसराना में ज्वाइन किया था। उस समय कॉलेज में चारों तरफ बड़ी-बड़ी घास थी। कॉलेज का मैदान भी उबड़ खाबड़ था। उनको कॉलेज में इको क्लब का प्रभारी बनाया गया। उन्होंने दो अक्तूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर पौधरोपण अभियान शुरू किया। इसे नियमित रूप से शुरू कर दिया। कॉलेज के बच्चों को साथ लेकर कॉलेज को हरा-भरा बना दिया। इसके बाद उनका पर्यावरण संरक्षण के लिए जुड़ाव हो गया। उन्होंने फिर पौधरोपण के लिए मुड़कर नहीं देखा। उनको पौधरोपण के लिए राज्यपाल द्वारा सम्मानित और दो बार अंतरराष्ट्रीय, आठ बार राष्ट्रीय व 200 संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया। राष्ट्रीय भीम रत्न अवार्ड से सम्मानित किया। सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण संरक्षण का चार बार अवार्ड मिला है। इसके साथ लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है।
कॉलेज में रोज गार्डन बना दिया, यहां घूमते हैं मोर
ग्रीनमैन प्रो. दलजीत कुमार ने बताया कि उनका फिर पानीपत के देशबंधु गुप्ता राजकीय महाविद्यालय में तबादला हो गया। पेड़ पौधों के सूखे पत्तों से ग्रीन खाद बनानी राजकीय कॉलेज इसराना में नर्सरी बनाई। उन्होंने तीन सितंबर 2021 को ज्वाइन किया। यहां हर्बल बाेटेनिकल गार्डन और रोज गार्डन बनाया। इसमें कॉलेज के विद्यार्थियों का पूरा योगदान मिला। ग्रीन श्मशान घाट अभियान शुरू किया। कॉलेज ऑक्सीजन बाग, पक्षी विहार, जैविक खाद केंद्र, दूसरे कॉलेजों में हर्बल गार्डन बनाना शुरू किया। 28 स्थानों पर हर्बल गार्डन, 70 हजार पौधे लगा चुके हैं। पौधे लगाने के साथ उसका संरक्षण करते हैं। लोगों से पहले ही तय करते हैं। संरक्षण करने पर ही पौधा लगाया जाएगा। बेटा-बेटी एक समान, एक पौधा बेटी के नाम करीब 500 पौधे लगा चुके हैं। एक पौधा अपने और एक पौधा अपने माता-पिता के नाम अभियान में प्रत्येक वर्ष दो पौधे लगाए जाते हैं। इसमें अब 10 हजार लोगों को जोड़ चुके हैं।
सर्कल बनाकर आगे से आगे लोगों को जोड़ रहे हैं। प्रकृति बचाओ-सम्मान पाओ, इसमें मेहमानों को पगड़ी पहनाकर पौधे लगवाते हैं। कैथल, फतेहाबाद भूना व पंचकूला में हर्बल बोटेनिकल गार्डन बना चुके हैं। शुगर मिल पानीपत में समय-समय पर एक पौधे लगा चुके हैं। हैदराबाद, तेलंगाना, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में पौधे पहुंचाए हैं। पौधों का लंगर अभियान 2019 में शुरू किया। वे जन्मदिन या विशेष दिन पर लंगर लगाया जाता है।
हर्बल पौधे लोगों को बांटते हैं।
औषधी पार्क में हर तरह के पौधे
औषधी पार्क में आठ प्रकार की तुलसी, दो तरह की इंसुलीन, कपूर, अर्जुन, कचनार, पीपल, बरगद, अश्वगंधा, काला बांसा, पीला बांसा, हींग, लोंग, पान के पौधे लगाए हैं। फलों में 20 प्रकार के पौधे हैं। राष्ट्र पक्षी मोर का झुंड कॉलेज में रहता है। पहले यहां दो मोर आते थे। अब इनकी संख्या 10 तक पहुंच गई है।