Ashish Dhonchak Panipat: सेना में जाने के बाद मेजर आशीष का अगला सपना अपने लिए सपनों का घर बनाना था। उन्होंने करीब दो साल पहले टीडीआई में 250 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा। हर एक चीज को बारीकी से परखने के बाद नक्शा पास कराकर घर बनवाना शुरू किया। 23 अक्तूबर को मेजर आशीष का जन्मदिन था। यही कारण है कि उन्होंने छुट्टी लेकर आने पर गृह प्रवेश कर अपना जन्मदिन नए घर में मनाने की तैयारी कर रखी थी। लेकिन जीते जी सपनों के घर में नहीं आ सके।
मेजर आशीष ने मेहनत से अपने सपने का आशियाना बनाया था। परिजनों के साथ 23 अक्तूबर को नए मकान में शिफ्ट होकर जन्मदिन मनाने की तैयारी थी, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। सपनों का आशियाना तो उन्होंने बना लिया, लेकिन उसमें शिफ्ट होने से पहले ही देश के लिए शहीद हो गए।
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गुरुवार को उनकी शहादत की खबर घर पहुंची तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस दौरान मां कमला और परिजनों का कहना था कि जीते जी तो बेटा सपनों के घर में नहीं आ सका, अब उसका पार्थिव शरीर वहीं आएगा।
चचेरे भाई आदर्श ने बताया कि 23 अक्तूबर को मेजर आशीष का जन्मदिन था। यही कारण है कि उन्होंने छुट्टी लेकर आने पर गृह प्रवेश कर अपना जन्मदिन नए घर में मनाने की तैयारी कर रखी थी। लेकिन अब उनका जन्मदिन हम नहीं मना पाएंगे।
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आदर्श ने बताया कि मेजर आशीष बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे और खेलों में भी आगे रहते थे। एयरफोर्स में कार्यरत चाचा दिलावर को आदर्श मानकर उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया और पहले ही प्रयास में भारतीय सेना में सीधे लेफ्टिनेंट भर्ती हुए।
सेना में जाने के बाद उनका अगला सपना अपने लिए सपनों का घर बनाना था। उन्होंने करीब दो साल पहले टीडीआई में 250 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा। हर एक चीज को बारीकी से परखने के बाद नक्शा पास कराकर घर बनवाना शुरू किया।
अप्रैल 2023 में मैदानी-तल का निर्माण पूरा हुआ तो परिवार ने नए घर में शिफ्ट करने की इच्छा जताई, लेकिन बुजुर्ग मां-बाप को मशीनों का शोर और धूल-मिट्टी से परेशानी ना हो, इसलिए मेजर आशीष ने परिवार को ऊपरी मंजिलों का काम पूरा होने तक थोड़ा और इंतजार करने को कहा।
किसी को नहीं पता था कि ये इंतजार इतना लंबा हो जाएगा कि मेजर आशीष कभी अपने सपनों के घर में ही नहीं रह पाएंगे। मेजर आशीष चार माह पहले दो मई को छुट्टी पर आए थे। उस समय जींद के न्यू अर्बन एस्टेट में साले विपुल की शादी में ही छुट्टियां बीत गई।
ड्यूटी पर लौटने से पहले उन्होंने अपने सपनों के आशियाने को आखिरी बार देखा था। परिवार को कहा था कि अब अगली बार नए घर में ही सब से मुलाकात करेंगे, लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि अगली मुलाकात इस तरह होगी।
टीडीआई निवासी पड़ोसी रामकुमार ने बताया कि पड़ोस में लगभग दो साल पहले मेजर आशीष ने प्लॉट लिया था। उन्होंने इसको बनाना शुरू किया। मेजर आशीष से अब तक दो बार बातचीत हो पाई। एहसास हुआ कि देश के जवान सचमुच बहुत अच्छे स्वभाव के होते हैं। इतनी कम उम्र में बिना वर्दी के भी उनका रौब साफ झलकता था।