जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत को भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) से व्यापार बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। यह समझौता उस वक्त हुआ है जब अमेरिका समेत कई देश नए टैरिफ कार्ड लागू करने में लगे हुए हैं।
अमेरिका ने तीन महीने की दी गई छूट को एक माह के लिए बढ़ाया है। अमेरिका में जहां पानीपत का सालाना करीब 10 हजार करोड़ का व्यापार होता है। वहीं ब्रिटेन के साथ 400 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यापार होता है। यह द्विपक्षीय वार्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े देशों में युद्ध होने के चलते बढ़कर दोगुना हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टेक्सटाइल व गृह सज्जा के सामान में भारत का चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कंबोडिया, श्रीलंका और तुर्किये के साथ कड़ा मुकाबला है। पानीपत के टेक्सटाइल की अमेरिका सबसे बड़ी मंडी है। यहां हर साल करीब 10 हजार करोड़ का व्यापार होता है। अमेरिका ने पिछले दिनों नया टैरिफ कार्ड लागू कर यहां के उत्पादों पर टैरिफ आठ से बढ़ाकर 26 कर दिया था। इससे काफी ऑर्डर वापस होने लगे थे। इस बीच अमेरिका ने तीन महीने की छूट दे दी थी जिससे करीब 300 करोड़ रुपये के ऑर्डर बच गए थे। नौ जुलाई को तीन महीने की समय अवधि पूरी हो चुकी है।
अमेरिका ने इसे एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। उद्यमी अमेरिका के लिए उत्पाद तैयार करने के लिए झिझकने लगे थे। ऐसे में काम भी मंदा पड़ा गया था।
भारत और ब्रिटेन के बीच सीईटीए पर 24 जुलाई को समझौता हुआ है। इसमें ब्रिटेन को होने वाले 99 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क मुक्त होगा। इससे कपड़ा शून्य शुल्क लागत पर ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश करेंगे। इसके साथ चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न व आभूषण, खिलौने, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, कृषि उत्पाद और ऑटो घटक भी इसमें शामिल होंगे। पानीपत का निर्यात करीब 20 हजार करोड़ रुपये का है। व्यापारी गुलशन मल्होत्रा ने बताया कि पानीपत के कुशन, कंबल, चादर, बेडकवर और बाथमैट जैसे हथकरघा उत्पाद की अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में अच्छी मांग है।