पानीपत। आने वाले दो माह में नगर निगम के चुनाव प्रस्तावित हैं, सरकार नई वार्डबंदी का ड्रॉफ्ट मांग रही है। वार्डबंदी में पांच बार संशोधन होने के बाद भी ड्रॉफ्ट अब तक फाइनल नहीं किया गया है। इसे लेकर अधिकारी से लेकर निवर्तमान पार्षद तक परेशान हैं।
एडहॉक कमेटी के सदस्यों का मानना है कि निकाय चुनाव जनवरी 2025 के अंत या फरवरी के प्रथम सप्ताह में होने का अनुमान है। इसे लेकर सरकार तैयारियों में जुटी है जबकि दूसरी ओर पानीपत नगर निगम क्षेत्र की वार्डबंदी अब तक फाइनल ही नहीं हो पाई है।
इसे लेकर सरकार का नगर निगम अधिकारियों पर दबाव भी है कि वे जल्दी वार्डबंदी का ड्रॉफ्ट मुख्यालय भेजें लेकिन पांच बार वार्डबंदी के ड्रॉफ्ट में बदलाव करने के बाद भी इसे फाइनल नहीं किया जा सका है।
जिसका मुख्य कारण दो अतिरिक्त वार्ड बनाए जाने से बदली सभी वार्डों की सीमाएं और बाद में कुछ वार्डों की सीमाओं का दोबारा दोनों विधानसभा क्षेत्रों में विलय बताया जा रहा है। अधिकारियों ने अंतिम ड्रॉफ्ट को मंत्री एवं ग्रामीण विधायक और शहरी विधायक को भिजवा दिया है। उनकी ओर से इसकी जांच की जा रही है।
उनके फाइनल करने के बाद नई वार्डबंदी को सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसे लेकर बुधवार को भी बैठक होनी तय थी लेकिन नेताओं की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी।
अब अनुमान है कि वीरवार को दोनों मंत्री और विधायक एकमत से नए संशोधित ड्रॉफ्ट पर अपनी सहमति देंगे तो इसे फाइनल किया जाएगा।
फिर से हो सकता है नया बदलाव: बताया जा रहा है कि मंगलवार तक तैयार किए गए पांचवें संशोधन में फिर से कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। हालांकि इस नए ड्रॉफ्ट को नेताओं की डिमांड के अनुसार तैयार किया गया था।
इसके बाद भी सभी वार्डों के पार्षद अपने अपने वार्ड की सीमाओं को बदलवाने और वार्डों के आरक्षण को लेकर नेताओं के दरबार में पहुंच जाते हैं। ड्रॉफ्ट को परिवार पहचान पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें जितने संशोधन की गुंजाइश थी उसे भी किया गया है लेकिन सभी निवर्तमान पार्षदों की इच्छा के अनुसार इसको संशोधित नहीं किया जा सकता। अगर कुछ बदलाव की गुंजाइश होगी तो उसे भी बदल दिया जाएगा।
नई वार्डबंदी के ड्रॉफ्ट में अब तक सिर्फ ये फाइनल हुआ है कि सात लाख जनसंख्या के आधार पर शहर के 28 वार्ड बनेंगे। इनमें से पांच वार्ड एससी होंगे और बीसी- ए के साथ पहली बार बीसी-बी वर्ग के वार्डों को भी आरक्षित किया जाएगा। वहीं, महिलाओं का आरक्षण अलग से रहेगा। इनमें से एक तिहाई वार्डों की सीमाओं का फिर से विलय होगा।