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Panipat News: एडीसी और महिला अधिवक्ता में बहस, वकीलों ने किया प्रदर्शन

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माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। फैमिली आईडी में आय संशोधन के एक मामले को लेकर एडीसी अंकित कुमार चौकसे और महिला अधिवक्ता ज्योति चौहान के बीच बुधवार को विवाद हो गया। नाराज अधिवक्ताओं ने एडीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अधिकारी के तबादले की मांग की।
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महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि समाधान के लिए एडीसी कार्यालय पहुंचने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और निजी जीवन को लेकर टिप्पणी की गई। जिला बार एसोसिएशन ने वीरवार को न्यायिक कार्य से दूर रहने का निर्णय लिया है। एडीसी ने महिला अधिवक्ता के आरोपों को निराधार बताया है।
महिला अधिवक्ता ने लगाया अभद्र व्यवहार का आरोप : वरिष्ठ भाजपा नेता एवं अधिवक्ता सुभाष सैनी के चैंबर में जूनियर अधिवक्ता के तौर पर कार्यरत ज्योति चौहान ने बताया कि फैमिली आईडी में आय अधिक दर्ज होने के कारण उनका राशन कार्ड कट गया था। उन्होंने बताया कि वह अपने तीन वर्षीय बच्चे का पालन-पोषण कर रही हैं और वकालत से करीब पांच हजार रुपये मासिक आय होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए वह एडीसी कार्यालय पहुंची थीं।
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ज्योति चौहान का आरोप है कि अपनी आर्थिक स्थिति बताने पर एडीसी ने उनसे कहा कि काम नियमों के अनुसार होगा और वकालत का रौब न दिखाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके तलाकशुदा होने को लेकर भी टिप्पणी की गई और उनके खर्च को लेकर सवाल किया गया। इसके बाद उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया।
जानकारी मिलने पर अधिवक्ता एडीसी कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन की संयुक्त सचिव अर्पिता सिंगला समेत कार्यकारिणी के सदस्यों ने भी विरोध जताया। अर्पिता सिंगला ने आरोप लगाया कि एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया गया।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान वीरेंद्र मलिक ने बताया कि वीरवार को जिले के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूर रहेंगे। इस दौरान कोई अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निर्णय का उल्लंघन करने वाले अधिवक्ता पर एसोसिएशन की ओर से 5100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। मुंशी, क्लर्क और कानून के प्रशिक्षु विद्यार्थियों को भी अदालती पोशाक में नहीं आने के निर्देश दिए गए हैं।

एडीसी बोले-नियमों के तहत हुई कार्रवाई
एडीसी अंकित कुमार चौकसे ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि 13 जुलाई को समाधान शिविर में फैमिली आईडी के आधार पर बने राशन कार्ड को लेकर शिकायत मिली थी। जांच में संबंधित परिवार के सरकारी आवास में रहने तथा एसी और दोपहिया वाहन होने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट पर परिवार की घोषित वार्षिक आय को संशोधित कर 1.80 लाख से तीन लाख के दायरे में किया गया था।
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