समालखा। गांव हथवाला की 2106 एकड़ जमीन की गलत चकबंदी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में ग्रामीणों ने अपनी जांच कर रिपोर्ट जांच कमेटी और एडीसी को सौंपी है। ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिला है और इसके लिए एक कमेटी की गठित कर दी गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 60 वर्ष पहले उर्दू में की गई चकबंदी को हिंदी में बदलने के दौरान धांधली की गई है। इससे गांव के 90 प्रतिशत किसानों की जमीन को केवल पांच प्रतिशत किसानों के नाम कर दिया है। सरकार के साथ ही कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन किया गया है। ग्रामीण राम दिया ने बताया कि उन्होंने प्रशासन की ओर से गठित जांच कमेटी के समक्ष अपने गांव की इस जमीन का 150 वर्ष पुराना रिकार्ड प्रस्तुत किया है।
उनकी जमीन की चकबंदी 1965-66 में हो चुकी है तो दोबारा नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारी 60 वर्ष पहले की गई चकबंदी को गलत नहीं साबित कर सकते हैं। इस पर कमेटी ने माना है कि चकबंदी में लापरवाही बरती गई है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि गलत चकबंदी करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों पर विजिलेंस के मुकदमे भी दर्ज हैं।
उन्होंने बताया कि इस चकबंदी के समय 42 सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी। इसमें से 36 सदस्यों ने शपथपत्र देकर आरोप लगाया था कि 90 प्रतिशत रिकॉर्ड गलत चढ़ाया गया है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गई। गांव हथवाला के किसान रामदिया त्यागी ने बताया कि जांच कमेटी के सामने उनके साथ अमरीश, नीरज त्यागी, शिव कुमार त्यागी, राजबीर त्यागी, सतीश त्यागी, रामपाल, रविदत्त आदि भी प्रस्तुत हुए।