पानीपत। गाय की मृत्यु होने के बाद क्लेम न देना बीमा कंपनी को भारी पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे कंपनी की मनमानी मानते हुए कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ क्लेम देने के आदेश दिए हैं। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि बिना किसी ठोस कारण बीमा क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता। खास बात यह है कि क्लेम के लिए किसान ने छह साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
पानीपत के किसान सुरेश ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी दो दुधारू गायों का न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था।
बीमा पॉलिसी 4 जुलाई 2020 से 3 जुलाई 2021 तक प्रभावी थी। बीमा के दौरान 12 जुलाई 2020 को एक गाय की अचानक मौत हो गई। पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम में मौत का कारण एक्यूट ट्रिपैनोसोमियासिस बीमारी बताया।
बीमे से संबंधित सभी दस्तावेज कंपनी कंपनी के कार्यालय में जमा कराकर 58 हजार रुपये के क्लेम का दावा किया। लेकिन, कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि गाय की मौत बीमे के 15 दिन के अंदर हो गई थी।
इस मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा ने की। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि बीमारी पहले से मौजूद थी।
आयोग ने कहा कि एक्यूट बीमारी का मतलब अचानक उत्पन्न होना होता है और बीमा अवधि में ऐसी बीमारी से मौत होने पर क्लेम बनता है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह किसान को 58 हजार रुपये बीमा राशि, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 11 हजार रुपये मानसिक कष्ट के लिए मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करे।