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मंजिल पर आकर सफर की सारी परेशानियां हुईं दूर

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पानीपत। दूसरे राज्यों एवं जिलों से आए श्रद्धालुओं को सफर में कठिनाई झेलनी पड़ी, लेकिन गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश उत्सव का हिस्सा बनकर सारी परेशानी दूर हो गई। श्रद्धालुओं ने कहा कि पंडाल देखकर ही मन प्रसन्न हो गया। इतना बड़ा पंडाल पहले कभी नहीं देखा।
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हरियाणा के विभिन्न जिलों के साथ ही दिल्ली एवं पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह आठ बजे से ही श्रद्धालुओं का पानीपत आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं को गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की जानकारी देती प्रदर्शनी सबसे ज्यादा पसंद आई। इसमें श्रद्धालुओं को निशुल्क किताबें भी वितरित की गईं।
श्रद्धालुओं का कहना:
पंडाल देखकर ही चेहरे पर मुस्कान आ गई
रास्ते में कभी बस में तो कभी ट्रैफिक जाम में परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन पंडाल देखने ही चेहरे पर मुस्कान आ गई। पंडाल का प्रवेश गेट देखकर लगा कि यह गुरुद्वारा है। - शिंदो, निवासी चाबा
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रबड़ी, गुलाब जामुन सब प्रसाद में मिले
पंडाल तो इतना सुंदर है ही। यहां पर खाने-पीने के स्टॉल बहुत रहे। पता नहीं कहां से इतने दानियों को बाबा ने भेजा। जिन्होंने शाही खाना खिलाकर हमारा स्वागत किया। मैं अपने बच्चों को लेकर आई हूं। पहले सोच रही थी कि कहीं भूखा न रहना पड़े, यहां आकर विभिन्न व्यंजन प्रसाद में मिले। - चाबा देवी, कैथल
लगा अंबाला या दिल्ली के गुरुद्वारे में आ गई
गेट देखकर ऐसा लगा कि मैं अंबाला और दिल्ली के किसी गुरुद्वारे में आ गई। दिनभर गुरबानी हुई, सुनकर अच्छा लगा। जब तक गुरबानी चलेगी तब तक बैठूंगी। प्रदर्शनी सबसे अच्छी लगी है। जहां किताबों के साथ मार्शल आर्ट भी देखने को मिली। - निशा रानी, लुधियाना
कीर्तन हॉल में दिनभर गुरबानी सुनने का मजा ही कुछ रहा। अलग-अलग जत्थों की गुरबानी सुनकर दिनभर संगत निहाल रही। पिछले तीन दिन से रात को पंडाल को देखकर जाती थी और इंतजार कर रही थी कि कब प्रकाश उत्सव आए। आज सुबह छह बजे ही पंडाल में आ गई थी। - टुपुर, पानीपत
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