संवाद न्यूज एजेंसीपानीपत। प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों में स्नातक द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का नया शैक्षणिक सत्र दाखिला प्रक्रिया शुरू न होने के कारण अधर में लटका हुआ है। परीक्षाएं करीब 15 जून तक समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद वरिष्ठ कक्षाओं के लिए प्रवेश पोर्टल नहीं खुला है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और पूरे शैक्षणिक कैलेंडर पर पड़ रहा है।
शिक्षाविदों का कहना है कि इस बार उच्चतर शिक्षा निदेशालय और विश्वविद्यालय के बीच प्रवेश कार्यक्रम को लेकर समन्वय का अभाव दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय ने एक अगस्त से नियमित कक्षाएं शुरू करने का शेड्यूल जारी कर दिया है, जबकि निदेशालय ने अभी तक द्वितीय और तृतीय वर्ष के दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
कॉलेजों का मानना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कक्षाएं शुरू हो पाएंगी। यदि पोर्टल जल्द नहीं खुला तो नियमित कक्षाएं 20 अगस्त के आसपास शुरू होने की संभावना है।
समय पर पाठ्यक्रम पूरा करना बनेगा चुनौती
n शिक्षाविदों के अनुसार यदि जुलाई के पहले सप्ताह में ही वरिष्ठ कक्षाओं का प्रवेश पोर्टल खोल दिया जाता, तो दाखिले समय पर पूरे कर विश्वविद्यालय के तय कार्यक्रम के अनुसार एक अगस्त से कक्षाएं शुरू कराई जा सकती थीं।
n स्नातक प्रथम वर्ष के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चल रही है, द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए अलग से प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर पढ़ाई कराई जा सकती है।
n विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित सेमेस्टर परीक्षाओं से पहले पूरा पाठ्यक्रम पूरा कराना अब शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि कक्षाएं देर से शुरू हुईं तो पढ़ाई का दबाव विद्यार्थियों और शिक्षकों, दोनों पर बढ़ेगा।
एक साथ पोर्टल खुलने से बढ़ सकता है तकनीकी दबाव
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि प्रथम वर्ष के साथ ही द्वितीय और तृतीय वर्ष का प्रवेश पोर्टल खोला गया तो बड़ी संख्या में आवेदन आने से पोर्टल पर तकनीकी दबाव बढ़ सकता है। इससे विद्यार्थियों को आवेदन करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और जुलाई का अधिकांश समय पढ़ाई शुरू होने से पहले ही निकल जाएगा।
पोर्टल खुला तो होंगे फायदे
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वरिष्ठ कक्षाओं के लिए अभी अलग से प्रवेश पोर्टल खोल दिया जाए तो तीन बड़े लाभ होंगे। विद्यार्थियों की पढ़ाई तुरंत शुरू हो सकेगी, प्रथम वर्ष के पोर्टल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं का भी प्रभावी उपयोग हो सकेगा। साथ ही विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार समय पर पाठ्यक्रम पूरा कर नवंबर-दिसंबर की परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कराई जा सकेगी।
द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। वरिष्ठ कक्षाओं के अधिकांश विद्यार्थी पहले से ही संबंधित कॉलेजों से जुड़े होते हैं, इसलिए उनका दाखिला शीघ्र पूरा कर नियमित कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। इससे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर का पालन होगा और समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने में भी सुविधा रहेगी। -डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य, आर्य पीजी कॉलेज, पानीपत