समालखा। आठ पहर कांशी और एक पहर जौरासी की मान्यता वाले प्राचीन शिव मंदिर में बुधवार को महाशिवरात्रि पर हर साल की तरह आस्था का सैलाब उमड़ा। दिनभर शिव लिंग पर जलाभिषेक करने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गांव की सुख-शांति के लिए ग्रामीण द्वारा हरिद्वार से तीन दिन में लाई गई झिलमिल कावड आकर्षण का केंद्र रही। शहर व गांव के शिव मंदिरों में सुबह से जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी लंबी कतार लगी रही।
गांव जौरासी के प्राचीन शिव मंदिर में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। यहां दिल्ली, सोनीपत, पानीपत, गन्नौर और समालखा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान अलग-अलग लंबी लाइनों में खड़े श्रद्धालुओं ने अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। बारी बारी से सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव शंकर के दर्शन किए और शिवलिंग पर दूध ,जल, फल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इसके साथ ही बोर्ड की परीक्षाओं को देखते हुए छात्र छात्राओं ने भी परीक्षाओं में सफल होने की कामना कर भोले बाबा की पूजा अर्चना की।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राघव शास्त्री व उनकी पत्नी जानकी के अलावा श्रद्धालुओं ने बच्चों को आशीर्वाद दिया और मेहनत व लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। कुछ श्रद्धालु तो अपने नन्हे बच्चों को भगवान भोले शंकर की वेशभूषा में सजाकर लाए। इससे पहले काफी गांव की महिलाएं भगवान के गीत गाते हुए मंदिर पहुंची। महाशिवरात्रि को लेकर खासकर महिलाओं में काफी जोश व उत्साह दिखाई दिया। भगवान शिव शंकर की महिमा का जमकर गुणगान किया गया। हरिद्वार से करीब दो लाख की लागत से एक टन वजनी सुसज्जित झिलमिल कांवड़ मंदिर पहुंची, जो आकर्षण का केंद्र बनी। मंदिर कमेटी प्रधान पंडित रामकुमार शर्मा ने बताया कि सुबह मंदिर प्रांगण में हवन यज्ञ किया गया जिसमे पूर्णाहुति के तत्पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुरेश मित्तल, राजेश पंडित,सेठपाल प्रजापत, अनिकेत व मास्टर सुरेंद्र मौजूद रहे।