प्रशासनिक निष्ठा और कला का अनूठा संगम : एचसीएस डॉ. किरण सिंह ने पानीपत की रामलीला में माता सीता का निभाया किरदार
मुख्य अतिथि बनकर पहुंची थीं अधिकारी, अब मंच पर प्रस्तुत किया मर्यादा और त्याग का आदर्श चरित्र-एमबीबीएस और कथक डिप्लोमा धारक हैं डॉ. किरण सिंह
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। प्रशासनिक दक्षता, उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक अभिरुचि जब एक साथ मिलती हैं तो व्यक्तित्व की एक अनूठी छाप छोड़ती हैं। हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. किरण सिंह ने इसी मिसाल को कायम किया है। पानीपत में जिला परिषद एवं जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर अपनी सेवाएं दे रही डॉ. किरण सिंह ने ऐतिहासिक श्री देवी मंदिर की प्रसिद्ध रामलीला के मंच पर ''माता सीता'' के पावन चरित्र को जीवंत किया।
रोचक बात यह है कि महज चार दिन पहले ही डॉ. किरण सिंह श्रीराम दशहरा कमेटी देवी मंदिर की रामलीला आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थीं। इसके बाद उन्होंने स्वयं मंच पर आकर अद्भुत अभिनय प्रस्तुत किया। प्रशासनिक सेवा से जुड़ी किसी वरिष्ठ अधिकारी का इस तरह सीधे तौर पर रंगमंच, भारतीय आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना अपने आप में एक अनोखा और प्रेरणादायी अवसर रहा।
बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी हैं डॉ. किरण
मूल रूप से कैथल जिले की रहने वाली डॉ. किरण सिंह का सफर बहुआयामी रहा है। उन्होंने पहले चिकित्सा क्षेत्र में सफलता हासिल करते हुए एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद प्रशासनिक सेवा में आकर जनसेवा का मार्ग चुना। उनके प्रशासनिक दायित्वों में ग्रामीण विकास योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन और जनहित के कार्यों की निगरानी शामिल रही है। चिकित्सा और प्रशासन के साथ-साथ उनका कला के प्रति रुझान भी बेहद गहरा है। उन्होंने शास्त्रीय नृत्य कथक में तीन वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया है। रंगमंच से उनका यह जुड़ाव उनके इसी कलात्मक दृष्टिकोण का परिणाम है।
सांस्कृतिक विरासत और मर्यादा का प्रतीक
माता सीता का चरित्र भारतीय संस्कृति में त्याग, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। डॉ. किरण सिंह ने बताया कि इस भूमिका को निभाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद अपकनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं के लिए समय निकाला जा सकता है।
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