पानीपत। औद्योगिक नगरी में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग फर्म के 700 बिल जारी कर आठ करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। यह फर्म दो साल पहले घाटे के कारण बंद कर दी गई थी। सीए समेत तीन लोगों ने 27 फर्म और सात विभागों के नाम बिल काटे हैं। अब ये फर्म और विभाग जांच के दायरे में हैं।
इसकी जांच अब पुलिस की स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट (एसडीयू) को सौंप दी है। टीम ने थाना मॉडल टाउन से फाइल मंगवा ली हैं। प्रथम दृष्टया संबंधित फर्म और विभागों में भी खलबली मची गई है। माना जा रहा है कि बिलों को सरकारी विभागों में प्रयोग कर फर्जी भुगतान किया है।
मॉडल टाउन थाना क्षेत्र की शुगर मिल कॉलोनी निवासी सुशीला देवी ने मॉडल टाउन थाने में सीए समेत तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सुशील देवी ने 30 नवंबर को एसपी को शिकायत देकर बताया था कि उन्होंने 2019 में राज एंड संस के नाम से प्लास्टिक रीसाइक्लिंग करने के लिए एक फर्म बनाई थी। उन्होंने कोरोना काल में व्यापार में नुकसान होने पर 2023 में फर्म को बंद कर दिया। अप्रैल माह में उन्होंने आयकर रिटर्न भरने के लिए फर्म के दस्तावेज सीए हिमांशु को सौंपे थे।
उनका आरोप था कि उनकी फर्म की आईडी और पासवर्ड बदलकर मई से अक्तूबर 2025 के बीच 27 अलग-अलग फर्मों के नाम पर 700 से अधिक बिल जारी किए गए। मात्र छह माह में ही फर्म के नाम पर आठ करोड़ रुपये का टर्न ओवर दिखाया गया। फर्म के नाम पर सीमेंट और सेनेटरी के बिल जारी हुए, जबकि उनकी फर्म का सेनेटरी और सीमेंट से कोई लेना देना नहीं था। सुशीला देवी की शिकायत पर एसपी ने शिकायत की जांच एएसपी को सौंपी थी।
एएसपी ने अपनी जांच में सभी बिलों और फर्म के दस्तावेजों की जांच की थी। जांच के दौरान प्रथम दृष्टया आरोप सही मिलने पर मॉडल टाउन थाने में आरोपी सीए हिमांशु उसके साथी हर्ष और अर्पित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एसपी ने इस मामले में तफ्तीश करने के आदेश दिए हैं। जिसे देखते हुए फर्जीवाड़े की तफ्तीश को स्पेशल डिटेक्टिव स्टॉफ को सौंपी दिया गया है। वीरवार को डिटेक्टिव स्टॉफ की टीम ने थाने से फाइल को अपने कब्जे में ले लिया है। तफ्तीश के दौरान सभी बिलों की जांच की जाएगी।