समालखा। छदिया गांव में गोशाला की ओर से आयोजित सांग महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को हरियाणवी लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। इस पर हरियाणवी लोकनाट्य परंपरा को जीवंत करते हुए सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद के पौत्र पंडित विष्णुदत्त ने प्रसिद्ध सेठ ताराचंद के सांग का मंचन किया।
सांग के माध्यम से बुरी संगत से बचने और सकारात्मक चिंतन अपनाने का प्रभावशाली संदेश दिया गया। मंचन के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में रागनियों और संवादों के जरिए दर्शकों को हरियाणवी संस्कृति की गहराई से रूबरू कराया। पंडित विष्णुदत्त ने बताया कि यह सांग उनके दादा सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद की रचना है। इसमें एक दानवीर सेठ के जीवन में कुसंगति के कारण आए पतन और फिर आत्मबोध से हुए उत्थान की कथा को दर्शाया गया है।
सांग में दिखाया गया कि दिल्ली के प्रसिद्ध सेठ ताराचंद अपनी दानवीरता और धर्म-कर्म के लिए जाने जाते थे, लेकिन उनके चाचा के पुत्र हरिराम ने उन्हें कुसंगति में धकेल दिया, इसके कारण वे दान-पुण्य से दूर हो गए और धीरे-धीरे आर्थिक संकट में फंस गए। हालात ऐसे बने कि उन्हें अपने छह वर्षीय पुत्र चंद्रगुप्त को 200 रुपये में गिरवी रखना पड़ा। सांग की रागिनियों में चुलकाना धाम स्थित चुनकुट महर्षि के इतिहास का भी वर्णन किया गया, इसमें यह संदेश दिया गया कि मनुष्य को कभी भी अपनी शक्ति और सामर्थ्य का अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है।
सांग में पंडित विष्णुदत्त के साथ सूबे सिंह, उमेद, करतार सिंह, सोनू, राममेहर, प्रकाश, विक्की, बिल्लू और दिलबाग ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर सरपंच रमेश वत्स, मदन शर्मा, इंद्र थानेदार, लछमन मिस्त्री, राजेश शर्मा, नारायण दत्त, पंडित नफे दत्त शास्त्री, खेमचंद, गंगा स्वरूप, जगमेंद्र वत्स आदि माैजूद रहे।