पानीपत। किसान की आठ एकड़ फसल खराब होने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने क्लेम के दावे को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान किसान ने अपने दावे के पक्ष में ठोस सबूत पेश नहीं किए। वहीं दुकानदार ने कहा कि वह केवल बीज विक्रेता था उसकी गुणवत्ता के लिए कंपनी ही सीधे तौर पर जिम्मेदार है। आयोग ने दुकानदार को राहत दी ओर किसान के दावे को खारिज कर दिया।
उरलाना के किसान सुबेग सिंह ने आठ एकड़ जमीन में मई 2022 में धान की बुआई की थी। उन्होंने ग्लोबल मार्का 1401 धान 20 का बीज, कीटनाशक और यूरिया खाद की सफीदों की एक दुकान से खरीदे थे। किसान का आरोप था कि बीज की गुणवत्ता खराब होने के कारण उनकी फसल नष्ट हो गई थी। जिस कारण उन्होंने सितंबर 2022 में दुकानदार को नोटिस भेजकर क्लेम की मांग की थी। लेकिन दुकानदार ने कोई जवाब नहीं दिया था। जिसके बाद किसान ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने 4.50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। किसान ने अपनी याचिका में दुकानदार को पार्टी बनाया था। जिसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। किसान ने बताया कि उसने बीज, खाद और कीटनाशक दुकान से खरीदे थे। वहीं, दुकानदार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह केवल मध्यस्थ है। बीज की गुणवत्ता के लिए कंपनी जिम्मेदार है।
आयोग ने सभी दावों की जांच की और दोनों पक्षों द्वारा अपने अपने पक्ष में पेश किए गए सबूतों की पड़ताल की। दस्तावेजों की जांच करते हुए आयोग ने पाया कि किसान ने अपनी फसल की सरकारी एजेंसी से जांच नहीं कराई। कृषि विभाग में भी इसकी शिकायत नहीं दी। जो वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं वह भी पर्याप्त नहीं है। वीडियो में खेत की सही लोकेशन और नुकसान की प्रामाणिकता स्पष्ट नही है। जिस कारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा और सदस्य विनीत कौशिक ने दुकानदार को राहत देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।