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सीवर के गिरने से एक साल की बच्ची की मौत

Mon, 04 Jan 2016 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
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हुडा सेक्टर-29 में खुले पड़े सीवर के मैन हॉल में गिरने से एक साल की बच्ची की मौत हो गई। हादसे के वक्त बच्ची अपने भाई और बहन के साथ सड़क पर खेल रही थी।
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पुलिस रातभर बच्ची को निकालने के लिए सीवर में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।   शव रातभर नाले में फंसा रहा। आरोप है कि पुलिस केवल एक बांस के सहारे की शव को निकालने की मशक्कत करती रही।

सुबह शव के ऊपर आने के बाद उसे निकाला गया। उल्लेखनीय है कि हुडा सेक्टर में करीब सौ मेनहॉल खुले पड़े हैं। जिनकी ओर हुडा का कोई ध्यान नहीं है।

मामला थाना चांदनी बाग क्षेत्र के अंतर्गत सेक्टर 29 पार्ट-टू का है। शनिवार शाम एक साल की बच्ची साइना अपने भाई शमशाद (5) और बहन शाइमा के पास फैक्टरी के बाहर खेल रही थी।
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मां नूरजहां फैक्टरी में काम कर रही थी। जबकि पिता मुस्तफा सैंपलिंग के काम से जालंधर गया हुआ था। साइना खेलते-खेलते खुले पड़े सीवरेज के पास पहुंच गई।

जब तक शमशाद और साइमा उसके पास पहुंचे। उसका पैस फिसल गया और वह सीवरेज में गिर गई। शाइमा ने घटना की सूचना अपनी मां नूरजहां को दी।

फैक्टरी के श्रमिक बच्ची को सीवर से बाहर निकालने की कोशिश में जुट गए। थाना चांदनी बाग पुलिस को सूचित किया गया।

सूचना पाकर थाना चांदनी बाग पुलिस प्रभारी राम कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बांस की सहायता से बच्ची को निकालने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

रातभर मशक्कत के बाद भी बच्ची को बाहर नहीं निकाला जा सका। सुबह सीवरेज में बच्ची का शव ऊपर आने के बाद उसका बाहर निकालकर शवगृह में रखवाया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।

खुले पड़े हैं करीब मौत के सौ मेनहॉल
हुडा के सेक्टर 25 और 29 में करीब सौ सीवरेज के ढक्कन खुले पड़े हैं। ये मेनहॉल हादसों को न्योता दे रहे हैं। ऐसे में प्रवासी मजदूरों के बच्चे जो अकसर सड़क पर खेलते हैं, यह सीवरेज उनकी जान के दुश्मन बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीवेरज के ढक्कन किसी भी सूरत में खुले नहीं रह सकते। अगर सीवरेज के ढक्कन खुले रहते हैं तो उसके कारण होने वाले हादसों का जिम्मेदार विभाग होगा।

कार्रवाई से बच रही पुलिस
बच्ची की सीवरेज में गिरने से मौत के बाद पुलिस हुडा विभाग के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है। जबकि सीवरेज के ढक्कन खुले होना साफ तौर पर हुडा की लापरवाही है।

पुलिस इस मामले में बच्ची की ही गलती निकाल रही है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि बच्ची सीवेरज के पास से रेत हटा रही थी। जिस कारण बच्ची सीवरेज में गिर गई।

 मां नूरजहां ने बताया कि वह मूलरूप से यूपी के संतकबीर नगर के रहने वाले हैं। वह अपने परिवार के साथ 25 साल से पानीपत में ही रह रहे हैं। यहां वह अपने पति मुस्तफा के साथ सेक्टर 29 में हैंडलूम की फैक्टरी में काम करती है। दोनों परिवार सहित फैक्टरी में ही बने क्वार्टरों में रहते है।

शुक्रवार को उसका पति मुस्तफा सैंपलिंग के लिए जालंधर गया था। शनिवार शाम छह बजे वह फैक्टरी में काम कर रही थी। तीनों बच्चे साइना, साइमा और शमशाद फैक्टरी के बाहर खेल रहे थे।

साइना फैक्टरी के बाहर खुले पड़े सीवरेज में गिर गई। साइना एक साल 12 दिन की थी। उसने आरोप लगाया कि अगर पुलिस और हुडा अधिकारी समय पर बचाव कार्य करते तो उनकी बच्ची सकुशल निकल सकती थी।

पुलिस अधिकारी एक बांस से बच्ची को निकालने में लगे रहे। उन्होंने आपदा प्रबंधों का सहारा लेना ठीक नहीं समझा और न ही प्रशासन को सूचना दी गई।


सीवरेज खुला नहीं था। बच्ची नाली के रास्ते से सीवर में गिरी है। ऐसे में हुडा की कोई गलती नहीं है। सेक्टर में कहीं भी सीवर के ढक्कन नहीं खुले पड़े है। मामले में 174 की कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
जयबीर सिंह,प्रभारी सेक्टर 29 पुलिस चौकी

जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा हुडा के सीवर ओवरफ्लो रहने पर कनेक्शन काट दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सीवर के ढक्कन खुले नहीं रह सकते। ऐसे में अगर सीवर के ढक्कन खुले हों और कोई हादसा हो जाए तो जिम्मेदारी विभाग की होती है। हुडा के अंतर्गत आने वाले सीवर उनके अंतर्गत नहीं आते। इसकी जिम्मेदारी हुडा की ही होती है।
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एसएस लौहान, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग पानीपत।
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