फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

-जिले में हर माह 40 से 50 करोड़ रुपये का टैक्सटाइल उत्पाद होता है आयात

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
टैक्सटाइल गुड्स के चैप्टर 50 से 63 की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई
जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। टैक्सटाइल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन को पछाड़कर अपने ही शहर में पिछड़ने वाले पानीपत के टैक्सटाइल को आक्सीजन मिल गई है। सरकार ने टैक्सटाइल गुड्स के चैप्टर 50 सेे 63 पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों की मानें तो सरकार के इस फैसले से खासकर पानीपत के उद्योग को सहारा मिलेगा। चीन का टैक्सटाइल नगरी पानीपत में हर माह होने वाला 50 करोड़ का बिजनेस घटकर लगभग आधा रह जाएगा। ऐसे में अब टैक्सटाइल उद्यमी अपने शहर, प्रदेश और देश में भी चीन के उत्पाद को मात दे सकेंगे। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स, टैक्सटाइल मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन और पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले को उद्योगों के लिए सराहनीय बताया है।
हैंडलूम नगरी से विख्यात पानीपत में तैयार हैंडलूम उत्पाद आज देश ही नहीं पूरे विश्व में अपना नाम चमका रहे हैं। यह 32 हजार करोड़ का बाजार है। इसमें अकेला डोमेस्टिक बाजार 25 हजार करोड़ का है। इंटरनेशनल मार्केट की बात करें तो विश्व के 42 लाख हैंडलूम उद्यमियों में से 39 लाख हैंडलूम उद्यमी देश के हैं। इनमें भी अधिकतर हरियाणा प्रदेश के हैंडलूम उद्यमी हैं। यह है पानीपत के हैंडलूम का इतिहास
विज्ञापन

देश बंटवारे के बाद पाकिस्तान से हैदराबादी बिरादरी पानीपत में आकर बसी। हैदराबारी बिरादरी ने 1947 में आते ही अपने घरों में चद्दर, और अन्य सामान बनाने शुरू कर दिए और आसपास के गांवों में जाकर बेचने लगे। हैंडलूम की धीरे-धीरे डिमांड बढ़ने लगी और इन लोगों ने मांग को पूरा करने के लिए घरों से बाहर निकलना शुरू कर दिया। 1970 में एक्सपोर्ट में उम्मीद नजर आने लगी। उद्यमी अमृतलाल बतरा, एमएम महाजन व अविनाश पालीवाल जैसे लोगों ने एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया। मात्र चार या पांच साल में एक्सपोर्ट में अपने पैर जमा लिए। 1984 में पानीपत में साढ़े तीन लाख हैंडलूम थी। 1987-88 में हैंडलूम में बदलाव आने लगे। हैंडलूम का रूप पिटरलूम और फ्रेम ने लेना शुरू कर दिया।
चीन को दिए गए ऑर्डर पर पड़ सकती है आंच
सर्दी के मौसम में टैक्सटाइल के आयात के साथ निर्यात भी बढ़ जाता है। पानीपत मार्केट में इस समय चीन के माल खासकर मिंक कंबल और रजाई के ऑर्डर सबसे ज्यादा हैं। व्यापारी ऑर्डर पूरे कराने को लेकर चीन के उद्यमियों व बायर्स से संपर्क करने में लगे हुए हैं। कस्टम ड्यूटी बढ़ते ही चीन का माल भी महंगा हो जाएगा। ऐसे में स्थानीय उद्योगों में तैयार माल के रेट के लगभग ही पहुंच जाएगा। ऐसे में व्यापारी अपने शहर में ही तैयार माल को लेना पसंद करेंगे। सरकार इंपोर्ट ड्यूटी समय पर लागू कर देती है तो इसका असर इसी सीजन में पड़ सकता है और चीन को जाने वाले ऑर्डर भी घट जाएंगे।
क्या कहते हैं उद्यमी और एसोसिएशनों के पदाधिकारी
चीन अपना उत्पाद मार्केट रेट से कम में बेच देता है, जबकि स्थानीय उद्यमी चाहकर भी पहले से ही निर्धारित अपने रेटों को कम नहीं कर सकते थे। ऐसे में लोग सस्ता समझकर चीन का उत्पाद ही लेना पसंद करते थे, लेकिन अब आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से चीन और दूसरे देशों से आने वाला उत्पाद महंगा हो जाएगा। इन हालातों में अपने उत्पाद की मांग बढ़ जाएगी।
रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन, पानीपत।
उद्योगपतियों की कमर टूटी पड़ी है। लघु उद्योग को कुछ सहारा देने की जरूरत है। सरकार को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने पड़ेंगे। सरकार की ओर से अब इनके हित में फैसला नहीं लिया तो उद्योग चला पाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को जीएसटी में 20 लाख के दायरे को बढ़ाकर 50 लाख करना चाहिए।
राकेश चुघ, युवा प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा व्यापार मंडल।
पानीपत में कपड़ा इंपोर्ट हो रहा था। जिसके चलते पानीपत के उद्योगों को अपने ही शहर में बाजार नहीं मिल पाता था। अब पानीपत के साथ अहमदाबाद व सूरत के व्यापारियों का सहारा मिलेगा।
अश्विनी शर्मा, उद्यमी।
सरकार की ओर से टैक्सटाइल गुड्स के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है। यह चैप्टर 50 से 63 तक रहेगी। इससे चीन व दूसरे देशों से आने वाले उत्पाद महंगे हो जाएंगे और स्थानीय उद्योगों से तैयार उत्पादों के बराबर रेट पहुंच जाएंगे। जिले का 20 से 25 करोड़ रुपये का व्यापार बढ़ जाएगा। वे इसको लेकर लंबे समय से सरकार के सामने मांग रख रहे थे। सरकार द्वारा देरी से लिया, लेकिन सही फैसला है। इससे पानीपत का व्यापार बढ़ेगा।
विज्ञापन

प्रीतम सचदेवा, प्रधान, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स, पानीपत।
केंद्र व प्रदेश सरकार का सपना मेक इन इंडिया का है और सरकार इस सपने को लगातार साकार कर रही है। पानीपत का हैंडलूम उद्योग भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने दो दिन के जनता दरबार में एक स्पेशल कार्यक्रम उद्योगपतियों के साथ रखा था। जिसमें उद्यमियों की समस्याओं को जानकर समाधान बताया था। जिला प्रशासन भी अपनी तरफ से हर संभव सहयोग दे रहा है।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी, पानीपत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें