ग्रामीणों और पुलिस का था दबाव, नहीं डिगा पिता, दो साल तीन माह तक लड़ता रहा केस, बेटी से रेप के दोषी सात साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले के एक गांव की सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 साल की छात्रा के साथ दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने सात साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। करीब दो साल तीन माह चले इस केस में अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश शशि बाला चौहान की अदालत ने दोनों पक्षों की सुनने के बाद फैसला सुनाया। फैसला सुनने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि उसके ऊपर ग्रामीणों और पुलिस से समझौते का काफी दबाव था। लेकिन वह अपनी बेटी के गुनहगार को छोड़ना नहीं चाहते थे। अब अदालत ने उन्हें न्याय दिया है। उसकी बेटी भी इस फैसले से खुश है।
मामला 13 जुलाई 2016 का है। जिले के एक गांव निवासी 13 वर्षीय नाबालिग उस समय गांव के सरकारी स्कूल में सातवीं की छात्रा थी। वह तीन बहनों में सबसे छोटी है। पिता बाबरपुर गांव में एक फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। गांव में पड़ोस में अजय (16) पुत्र राजपाल का घर है। 13 जुलाई की रात को छात्रा की मां को तेज खांसी हुई तो वह पानी लाने के लिए गली में ही लगे ट्यूबवेल पर गई थी। यहां पर अजय खड़ा था। अजय किशोरी का मुंह दबाकर उसे ट्यूबवेल वाले कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने किसी को इस बारे में बताने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी। किशोरी ने हिम्मत जुटाकर आपबीती अपने पिता व मां को बताई। इसके अगले दिन सदर थाना में इसकी शिकायत दी गई। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पीड़ित परिवार काफी गरीब है। वकील अनिल भान ने उनका फ्री में केस लड़ने का फैसला किया। आरोपी अजय उस वक्त नाबालिग था इसलिए उसे बाल सुधार गृह अंबाला भेज दिया गया था। कुछ दिन के बाद आरोपी को जमानत मिल गई और वह घर आ गया। लेकिन आरोपी ने इसके बाद भी किशोरी का पीछा नहीं छोड़ा। स्कूल आते जाते वो उसका रास्ता रोकता और छेड़छाड़ करता। आठवीं कक्षा में पिता को मनचले के लिए बेटी का स्कूल छुड़वाना पड़ा। इसके गांव के लोगों का भी दबाव किशोरी के पिता पर पड़ने लगा। लोगों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने के लिए काफी दबाव बनाया, लेकिन उसके पिता नहीं माने तो आरोपी ने किशोरी पर हमला भी किया। गांव लोगों ने उनसे बात भी करनी बंद दी।
करीब दो साल तीन माह कोर्ट में चले केस व 17 गवाह की गवाही के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशि बाला चौहान की अदालत ने दोषी करार देते हुए अजय को सात साल की कैद और 20 हजार रुपये की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद किशोरी के पिता ने कहा कि उसके ऊपर समझौते का काफी दबाव था। पुलिस ने भी कई बार उनको समझौते के लिए परेशान किया, लेकिन वह अपनी बेटी के गुनहगार को छोड़ना नहीं चाहते थे। अब अदालत ने उन्हें न्याय दिया है। उसकी बेटी भी इस फैसले से खुश है।