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सांप काटने से हर साल 58 हजार मौतें चिंता का विषय : स्नेकमैन

Wed, 03 Sep 2025 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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कुरुक्षेत्र। जागरूकता कार्यक्रम में संबो​धित करते स्नेकमैन। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें स्नेकमैन ऑफ हरियाणा के नाम से प्रसिद्ध सतीश फफड़ाना ने कहा कि देश में हर साल लगभग 58 हजार लोगों की मौत सांप के काटने से हो जाती है जबकि समय पर इलाज मिलने से इन मौतों को रोका जा सकता है।
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जानकारी के अभाव और झाड़-फूंक पर भरोसा करने के कारण स्थिति बिगड़ती है। उन्होंने बताया कि भारत में 272 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं जिनमें से अधिकतर जहरीले नहीं होते। अगर हजार लोगों को सांप काटता है तो लगभग 800 लोगों को गैर-जहरीले सांप काटते हैं, 150 लोगों को सामान्य जहरीला सांप और करीब 40 लोगों को कोबरा, जो जानलेवा साबित होता है। कई बार जहरीला सांप भी काटते समय जहर नहीं छोड़ता या बहुत कम मात्रा में छोड़ता है। ऐसे में लोग झाड़-फूंक से ठीक होने का भ्रम पाल लेते हैं लेकिन यदि वास्तव में जहर शरीर में पहुंच जाए और समय पर अस्पताल न ले जाया जाए तो जान बचाना मुश्किल हो जाता है। सही समय पर अस्पताल पहुंचाकर और एंटी डॉट लगवाकर 98 प्रतिशत मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि झाड़-फूंक जैसी परंपराओं से अनजाने में कीमती जानें चली जाती हैं। इस तरह की जागरूकता कार्यशालाएं लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और समय रहते अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित करती हैं। इसमें विद्यार्थियों को न केवल सांपों के महत्व और उनके पारिस्थितिकी योगदान के बारे में बताया बल्कि व्यावहारिक जानकारी भी दी कि सांप के काटने और घर में सांप घुसने की स्थिति में क्या करना चाहिए।
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सरकार कौशल निगम में रोजगार दे
स्नेकमैन सतीश फफड़ाना ने कहा कि विद्यार्थियों और स्टाफ को सांप के काटने और घर में सांप घुसने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। सरकार को युवा पीढ़ी को सांप पकड़ने की ट्रेनिंग देने के साथ कौशल निगम में रोजगार देना चाहिए, ताकि इंसानों की जान भी जोखिम में न पड़े और सांप भी जीवित रहें।
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