फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन साल बाद मिली डाहर शुगर मिल को हरी झंड़ी, 300.60 करोड़ की लागत से बनकर होगा तैयार, बनाने के लिए उतम इंडस्टी प्राइवेट लिमिट

विज्ञापन
विज्ञापन
तीन साल बाद मिली डाहर शुगर मिल को हरी झंडी, 300.60 करोड़ की लागत से बनकर होगा तैयार,
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। गन्ना किसानों की वर्षों से चली आ रही शुगर मिल की मांग को पूरी होने का समय आ गया है। सोमवार को हुई हाई परचेज कमेटी की बैठक में डाहर शुगर मिल का निर्माण करने के लिए उत्तम इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड को 300 करोड़ 60 लाख रुपये में टेंडर दिया है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद 11 माह के अंदर मिल बनकर तैयार हो जाएगी। ई टेंडरिंग के माध्यम से दो कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया था। जिसमें दूसरी कंपनी को रिजेक्ट कर दिया। कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, सहकारिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ज्योति अरोड़ा के अलावा सप्लाई एंड डिस्पोजल के निदेशक, वित्त विभाग के सचिव, शुगर फेड के प्रबंध निदेशक, उपायुक्त सुमेधा कटारिया और पानीपत शुगर मिल के एमडी संदीप अग्रवाल भी उपस्थित रहे। परिवहन एवं आवास मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने इसके बताया कि बुधवार को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिल कर शुगर मिल के शिलान्यास का समय लिया जाएगा ताकि समय रहते इसका काम शुरू हो सके।
प्रतिदिन 18 से बढ़कर 50 हजार क्विंटल होगी मिल की पिराई क्षमता :
नई शुगर मिल की क्षमता पुरानी मिल से लगभग तीन गुना होगी। पुरानी शुगर मिल की प्रतिदिन की पिराई क्षमता 18 हजार क्विंटल है, जो वर्तमान समय में घटकर 14 से 15 हजार पर चली गई है। नई शुगर मिल में यह बढ़कर 50 हजार क्विंटल पर पहुंच जाएगी। इस क्षमता को बढ़ाकर 75 हजार क्विंटल तक भी लाया जा सकता है। जिले में लगभग ढ़ाई हजार गन्ना किसान है, जिन को मिल बनने पर प्रत्यक्ष तौर पर फायदा पहुंचेगा।
विज्ञापन

सात की जगह साढ़े तीन माह में खत्म हो जाया करेगा सीजन :
पुरानी मिल की पिराई क्षमता कम होने के कारण मिल सात माह तक चलता है। जिस कारण मिल व किसान दोनों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। नई मिल शुरू होने के बाद गन्ना पिराई का सीजन साढ़े तीन माह में खत्म हो जाएगा। वर्तमान समय में जिले में 2475 किसानों ने 54 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पाद किया है। जिसकी खपत नई शुगर मिल की पिराई क्षमता के हिसाब से 108 दिनों में हो जाएगी।
दूसरे प्रदेशों व जिलों में जाने से मिलेगा छुटकारा :
किसानों को मिल की पिराई क्षमता कम होने के कारण दूसरे प्रदेेशों व जिलों में गन्ना लेकर जाना पड़ता है। पानीपत के किसानों के करोड़ों रुपये यूपी में बकाया है। इस वर्ष भी मिल का टारगेट मात्र 30 लाख क्विंटल गन्ने का है जबकि जिले में उत्पादन 54 लाख क्विंटल गन्ने का किया जा रहा है। जिस कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नई शुगर मिल बनने के बाद किसानों की इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
75 एकड़ में बनने वाली शुगर मिल में लगेगा 28 मेगावाट बिजली सयंत्र :
गांव डाहर में पुर्न स्थापित होने वाले इस चीनी मिल को 75 एकड़ में बनाया जाएगा। इसमे शुगर रिफाइनरी के साथ ही 28 मेगावाट का को-प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। जिसमें गन्ने की खोई से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इस प्लांट को कॉ- जनरेट भी कहा जाता है।
तीन साल चार माह बाद मिली मंजूरी :
18 अक्तूबर 2015 को जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस चीनी मिल के लिए पत्थर रखा था तभी से लोग सरकार की ओर बड़ी आस भरी नजरों से देख रहे हैं। जिसके बाद किसानों ने हर साल इसके लिए धरने दिये। जगह जगह ज्ञापन दिये, जिसके बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल रही थी। अब तीन साल चार माह बाद सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। जिसका शिलान्यास जल्द ही करने की बात कही जा रही है।
विज्ञापन

डिस्टलरी ईकाई की बढ़ेगी क्षमता, 30 की बजाए 45 हजार लीटर एथनॉल का प्रतिदिन होगा उत्पादन :
डिस्टलरी ईकाई की वर्तमान में 30 हजार लीटर की क्षमता है जोकि पुर्न स्थापना और आधुनिकीकरण के बाद इसकी क्षमता 45 हजार लीटर एथनॉल प्रतिदिन होगी। इस नए मिल के बनने से यह लाभ भी अर्जित करेगा। एथनॉल का प्रयोग पेट्रोल के साथ इंधन के रुप में किया जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें