फोन करने पर भी नहीं पहुंचती एंबुलेंस, निजी वाहनों का लेना पड़ता है सहारा
-एक साल में 15 महिलाओं की सिविल अस्पताल में पहुंचने से पहले रास्ते में हो चुकी है डिलीवरी
संदीप भौरिया
पानीपत।
स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस विंग की मनमर्जी से गर्भवती महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जब मरीज एंबुलेंस कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 108 पर फोन करते हैं तो काफी देर तक रिस्पांस नहीं मिलता। अगर कोई फोन उठा भी लेता है तो मरीज के पास एंबुलेंस नहीं भेजी जाती। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक इससे गर्भवती महिलाएं प्रभावित हैं। इनको रिक्शा, ऑटो व टैंपो में अस्पताल में लाया जाता है। ऑटो व टैंपो में झटके लगने से कई बार डिलीवरी बीच रास्ते में ऑटो में ही हो जाती है। अस्पताल पहुंचने तक अत्यधिक रक्त रिसाव होने के कारण जच्चा व बच्चा की हालत भी गंभीर हो जाती है। एक साल में ऐसे 15 मामले सामने आ चुके हैं जब फोन करने के एक घंटे के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची और महिलाओं ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया। इनमें से तीन नवजात की मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य विभाग के पास 14 एंबुलेंस हैं। इसमें से 10 को फील्ड में इसराना, समालखा, चुलकाना, हल्दाना, पत्थरगढ़, बापौली, सनौली, रेरकलां, कवी व हथवाला खड़ा किया गया है, ताकि आस पास हादसा होने पर कम से कम समय में एंबुलेंस पहुंच सके। 4 एंबुलेंस को सिविल अस्पताल में खड़ा किया है। इनकी जिम्मेदारी मरीज को घर से लाने व जाने की है।
सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 30-37 डिलीवरी होती है। डिलीवरी के लिए हर रोज लगभग 70 महिलाएं सिविल अस्पताल में आती हैं। इनमें से 40-45 महिलाएं निजी वाहनों में ही सिविल अस्पताल में पहुंचती हैं। रात के वक्त तो महज 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को सरकारी एंबुलेंस में अस्पताल में लाया जाता है। बार बार फोन करने के बाद भी कंट्रोल रूम में फोन नहीं उठाया जाता है। अगर फोन उठा भी ले तो कहा जाता है कि इतनी दूर सरकारी एंबुलेंस नहीं आ सकती। अब सिविल सर्जन ने इस बारे में एंबुलेंस विंग के कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
महिलाओं को डिलीवरी के बाद घर छोड़ने के लिए एक किलकारी नामक एंबुलेंस लगाई है। एंबुलेंस की कमी के कारण एक बार में 5-6 महिलाओं को घर छोड़ना पड़ता है। एक रूट की एक महिला की डिलीवरी के बाद घर जाने के लिए उसे 5-7 महिलाओं की डिलीवरी होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में वो कई घंटे तक अस्पताल के गेट पर ही इंतजार करते हैं।
सरकारी एंबुलेंस कर्मी गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं देने में पूरी तरह से विफल हो रहे हैं। उनकी इस सुस्ती का फायदा निजी एंबुलेंस चालक जमकर उठा रहे हैं। निजी एंबुलेंस चालक 5-7 किलोमीटर जाने के लिए तीमारदारों से 500-700 रुपये और 30-27 किलोमीटर जाने के लिए 1200-1500 रुपये वसूलते हैं। रात को इस राशि में बढ़ोतरी हो जाती है।
कब कब महिलाओं की रास्त में हुई डिलीवरी
मई 2017 में बराना गांव की महिला ने रास्त में बच्चे को जन्म दिया। एक घंटे तक एंबुलेंस बराना गांव में नहीं पहुंची थी। इसी माह में हरी नगर की महिला ने ऑटो में सिविल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। जून माह में भी दो महिलाओं की रास्ते में डिलीवरी हुई। जुलाई माह में अंबा कॉलोनी की महिला ने रास्ते में ऑटो में बच्चे को जन्म दिया। अगस्त माह में बबैल रोड की महिला की रास्त में डिलीवरी हुई। अक्टूबर में कुटानी रोड दलबीर नगर की महिला की ऑटो में डिलीवरी हुई। बच्चे की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। नवंबर माह में दो महिलाओं ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया। दिसंबर माह में समालखा से आई एक महिला ने निजी वाहन में बस स्टैंड के पास बच्चे को जन्म दिया। जनवरी व फरवरी माह में 4 महिलाओं ने ऑटो में बच्चे को जन्म दिया। मार्च, अप्रैल व मई में तीन महिलाओं ने रास्त में बच्चे को जन्म दिया। इसमें दो बच्चों की हुई मौत।
एंबुलेंस विंग वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी : वर्मा
उनके पास कई बार एंबुलेंस विंग वालों की शिकायतें आ चुकी हैं। उन्होंने इस बारे में कई बार एंबुलेंस चालकों को कड़े निर्देश दिए हैं। अब अगर कोई शिकायत मिलती है तो इन पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन पानीपत।