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1993 के इतिहास को देखकर सरकारी नौकरी के लालच में अस्थायी रोजगार छोड़कर आए थे युवा, हड़ताल खत्म होते ही आए सड़क पर

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1993 के इतिहास को देखकर सरकारी नौकरी के लालच में अस्थायी रोजगार छोड़कर आए थे युवा, हड़ताल खत्म होते ही आए सड़क पर
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- आउट सोर्सिंग वाले सभी कर्मचारी आज इकट्ठे होकर लेंगे फैसला, जा सकते है कोर्ट
- अधिकारियों ने नरवाल ऐजेंसी के माध्यम से किया था युवाओं को भर्ती, युवाओं का आरोप कि वो नहीं जानते कौनसी नरवाल एजेंसी
- युवाओं का कहना उन्होंने आपातकालीन में की सरकार की मदद, उनको इस प्रकार से निकालना गलत
पानीपत।
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बसों को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभाग द्वारा आउट सोर्सिंग पॉलिसी एक के तहत नरवाल ऐजेंसी के माध्यम से चालक व परिचालकों को बस सौंप दी गई थी। हड़ताल खुलते ही उन सभी कच्चे कर्मचारियों को विभाग द्वारा निकाल दिया गया है और उनकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। जिसके बाद हड़ताल के दौरान काम कर रहे युवाओं में रोष है और उनका कहना है कि विभाग द्वारा ही उनकों भर्ती के लिए सीधा कॉल आया था व फोन पर उन्हें रोडवेज विभाग में ड्यूटी ज्वाइन करने की बात कही गई थी। जिस कारण उन्होंने सरकारी नौकरी के चक्कर में अपनी पहली नौकरी छोड़ दी व रोडवेज विभाग में अपनी सेवाएं देनी शुरु कर दी। अब उन्हें कहा गया कि वह नरवाल एजेंसी के माध्यम से लगे थे, जबकी उन्हें यह तक नहीं पता है कि नरवाल कोन है और कहां की एजेंसी है। यह सरकार ने उनके साथ भद्दा मजाक किया है।
1993 के इतिहास को देखते हुए युवाओं ने ज्वाइन की थी नौकरी :
25 साल पहले भजनलाल सरकार के दौरान हुई स्ट्राइक में भी इसी प्रकार से कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। जिसमें सभी को सीधे बस सौंप दी गई थी। 13 दिन की हड़ताल खुलने के बाद जब उन्हें हटाया जाने लगा तो उन्होंने कोर्ट की श्रण ली और केस जीतकर अब भी विभाग में नौकरी कर रहे हैं। इसी इतिहास को देखते हुए युवाओं ने अपना रोजगार छोड़कर हड़ताल के दौरान नौकरी की, लेकिन अबकी बार सभी को आउट सोर्सिंग पॉलिसी एक के तहत ऐजेंसी के माध्यम से लिया गया है। वहीं युवाओं का कहना है कि विभाग ने ही उन्हें फोन करके बुलाया, उन्हें तो एजेंसी का पता तक नहीं। अब एक बार फिर सभी युवा इतिहास को साक्षी मानते हुए कोर्ट की श्रण लेने जा रहे हैं। जिसमें 200 अधिक युवा आज रणनीति बनाकर आगे की कार्यवाही करेंगे।
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क्या थी डिपो में भर्ती प्रक्रिया :
डिपो में सबसे पहले आरटीए के माध्यम से दस साल पुराने हैवी लाइसेंस वाले 56 परिचालकों की लिस्ट मंगवाई व उनको फोन करके बुलाया। उन सभी का टेस्ट लेकर उनमें से चयनित को रूट पर भेज दिया। वहीं विभाग ने 29 तारीख तक परिचालक के लिए एसपीओ का प्रयोग किया था। बाद में सीएम रैली के चलते उनकों भी प्रशासन ने वापस बुला लिया। जिसके बाद विभाग के अधिकारियों के कहने के अनुसार उन्होंने हेड ऑफिस के निर्देशानुसार एजेंसी के माध्यम से परिचालक व अन्य चालकों की भर्ती की। ताकि व्यवस्था सुचारु चलती रहे। सबको भर्ती करने से पहले बोल दिया गया था कि हड़ताल खत्म होते ही उन्हें निकाला जाएगा।
अस्थायी रोजगार को छोड़कर आये युवाओं की आपबीती :
स्कूल बस छोड़कर किया था ज्वाइन : बिजेंद्र
गांव चुलकाना निवासी बिजेंद्र ने बताया कि वह एक निजी स्कूल की बस चलाता था, जिसमें उनकी तन वा 15 हजार रुपये थी। 21 अक्तूबर को उनके पास डिपो से डीआई का फोन आया कि सुबह रोडवेज विभाग की नौकरी ज्वाइन कर ले, जिसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर रोडवेज विभाग में ज्वाइन कर लिया। अब उन्हें कहा जा रहा है कि तुम सभी ऐजेंसी के माध्यम से भर्ती हुए थे, लेकिन उन्हें ये तक नहीं पता की किस ऐजेंसी का क्या नाम है।
आपातकाल में की सरकार की मदद : मेहर सिंह
लौहारी गांव के निवासी मेहर सिंह ने कहा कि वह निजी बस पर ड्राइवर था और विभाग के एक फोन पर सरकार के लिए काम करना शुरु कर दिया। सरकार कींआपात स्थिती में काम आने के बाद सरकार को उन्हें इस तरह से हटाने का कोई अधिकार नहीं है।
निजी कंपनी में 12 हजार पर कर रहा था काम : पंवार
परिचालक के रुप में काम करने वाले सुनिल पंवार ने का कि वह एक प्राइवेट कंपनी में 4 साल से कार्यरत था,लेकिन सरकारी नौकरी के चक्कर में उन्होंने वहां से भी रिजाइन दे दिया व यहां से भी हाथ धो बैठे।
आरटीओ के माध्यम से किया भर्ती, अब बता रहे ऐजेंसी से : अनिल
गांव खेड़ा गोला के अनिल ने बताया कि वह इंडियन ऑयल की गाड़ी चलाता था, जिसपर उन्हें रोजाना 200 रुपये व अलग से 12 हजार रुपये तन वा मिलती थी, लेकिन उनके पास डिपो से डीआई का फोन आया कि आरटीए ने उनकी लिस्ट भेजी है और सुबह से रोडवेज की नौकरी पर आ जाए। अब जब हड़ताल खत्त्म हो गई है तो उन्हें विभाग कह रहा है कि वह ऐजेंसी के माध्यम से लगे थे,जिन्हें तन वा भी एजेंसी ही देगी। जबकी वह किसी ऐजेंसी के पास रजिस्ट्रड भी नहीं है।
हरियाणा रोडवेज के चक्कर में छोड़ दी डीटीसी की नौकरी : राणा
सोनीपत निवासी पूनित राणा ने बताया कि वह डीटीसी में नौकरी कर रहा था, लेकिन उन्हें पता चला की हरियाणा में रोडवेज विभाग की सीधी भर्ती निकली हुई है तो वह डीटीसी छोड़कर पानीपत रोडवेज विभाग में नौकरी करने लगा। हड़ताल खुलने के बाद प्रशासन द्वारा उन्हें हटा दिया गया है जिससे वह बेरोजगार हो गया है।
चार डंपर ठेके पर देकर कर लिया हर माह 1.30 लाख का नुकसान : नरेंद्र
बांध गांव के निवासी नरेंद्र ने कहा कि वह चार डंपरों का मालिक है जिन्हें खुद चलाकर हर माह दो लाख रुपये कमा लेता था, लेकिन सरकारी नौकरी के चक्कर में सभी डंपर ठेकेदार को एक साल तक 70 हजार रुपये में ठेके पर दे दिए। रोडवेज विभाग ने उनके साथ धोखा किया है, जिस कारण उनकों बहुत बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा। वह सभी कोट्र्र में अपने लिए न्याय मांग रखेंगे।
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उच्च अधिकारियों के निर्देश पर किए गये थे फोन : डीआई
पानीपत डीपो के डीआई कपुरचंद ने कहा कि उन्होंने उच्चअधिकारियों के निर्देशों पर ही लोगों के पास फोन किए थे। आउट सोर्सिंगा पॉलिसी एक के तहत लिए गए सभी युवाओं को हटाने का निर्देश आया है तो वह भी तुरंत प्रभाव से लागु हो गया है। इसमें वह अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते।
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