पानीपत। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अनुरूप जिला स्तर पर काम भी चल रहा है। एक जनवरी से 22 मार्च तक जिले में लगभग एक लाख लोगों की टीबी जांच हुई है। 1036 नए टीबी के रोगी मिले हैं। नौ लोगों की इन दिनों में टीबी से मौत हुई है। जिले में अब टीबी के 3533 मरीजों का इलाज चल रहा है। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 710 लोगों की मौत हो चुकी है। 2023 में भी 96 लोग टीबी से जिंदगी की हार गए थे।
शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। इन गांवों में टीबी का एक भी रोगी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन गांवों के सरपंचों को प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीबी मुक्त पानीपत के लिए हवन किया। टीबी मुक्ति के काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया गया । टीबी के नोडल अधिकारी डॉ. ललित वर्मा ने अपनी कार्यप्रणाली की रिपोर्ट पेश की।
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इन गांवों को किया गया टीबी मुक्त
जिले में फिलहाल टीबी के अतोलाुपर, बहरामपुर, मोहाली, नुरपुर मुगलान, संजौली,बिजावा,ब्राहम्ण माजरा, चमराड़ा,कैत,खलीला माजरा,भालसी,डुमियाना, खंदरा, ऊंटला, भैंसवाल,बुढ़नपुर, छदिया, ढोढपुर, गढ़ी छाजु, रायमल, सिंबलगढ़ व गांव निजामपुर को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।
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जिले में इलाज की व्यवस्था-
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
पूरा इलाज कराएं टीबी रोगी
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। पिछले तीन साल में जिले में लगभग पांच लाख लोगों की टीबी जांच हुई है। टीबी के रोगी तलाशने पर कर्मचारियों को भत्ता भी दिया जाता है। जागरूकता से टीबी को हराया जा सकता है। टीबी रोगियों से अपील है कि वो इलाज पूरा कराएं। मेडिकल स्टोर संचालकों से भी अपील की जाती है कि वो हर टीबी रोगी का डाटा उन्हें उपलब्ध कराएं।