पानीपत। शहर में 21 दिन में आग लगने से 4 मुख्य घटनाओं में फैक्टरियां पूरी तरह से नष्ट हो गई। इसमें उद्योगपतियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने का मुख्य कारण बढ़ती गर्मी में कमजोर वायर में स्पार्किंग होना बताया गया है। इसके अलावा दमकल विभाग आग पर काबू नहीं पा सका। माल खुदबखुद राख होकर बुझ गया। उद्योगपति शहर के फायर सिस्टम से खासे नाराज है। उद्योगपतियों का कहना है कि शहर का फायर सिस्टम काफी कमजोर है। पुराने तरीके से ही उद्योगों में आग बुझाई जाती है। इसमें घंटों लग जाते हैं। उद्योगपतियों की मांग है कि फायर विभाग के पास फोम टेंडर गाड़ी होनी चाहिए। जैसा रिफाइनरी व एनएफएल में होता है। शहर में किसी भी फैक्टरी में आग लग जाती है तो रिफाइनरी का सिस्टम ही काम आता है, लेकिन जब तक वो गाड़ियां पहुंचती है तब तक आग बेकाबू हो जाती है। उद्योगपतियों ने फायर सिस्टम को अत्याधुनिक बनाने के लिए शुक्रवार को शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी को अपना मांग पत्र सौंपा। इस मौके पर चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन विनोद खंडेलवाल, मनीष अग्रवाल, श्री भगवान अग्रवाल समेत तमाम औद्योगिक एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
पानी के लिए जूझ रही फायर बिग्रेड:
शहर की फायर बिग्रेड पानी के लिए जूझ रही है। हाली पार्क के पास स्थित फायर स्टेशन का ट्यूबवेल कई दिनों से खराब है। इसलिए वीरवार को फैक्टरी में लगी आग को बूझाने के लिए विभाग को 7 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ा। इस कारण आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके अलावा लाल बत्ती के पास फायर स्टेशन के ट्यूबवेल की मोटर भी खराब पड़ी है। ऐसे में फायर बिग्रेड विभाग से आग पर काबू पाने की उम्मीद रखना बेमानी ही होगी।
काफी फैक्टरियां बनी बिना नक्शे के, इसलिए भी होती है दिक्कत:
जिले में छोटी व बड़ी 30 हजार फैक्टरियां है। अधिकतर फैक्टरियां बिना नक्शे के ही बनी है। आग लगने की स्थिति में दमकल विभाग को आग पर काबू पाने के लिए दूसरी फैक्टरियां की छत पर चढ़ना पड़ता है। अंदर जाने व बाहर आने का रास्ता ढूंढना पड़ता है। अगर दमकल विभाग के पास हाईड्रॉलिक प्लेटफार्म व फॉम टेंडर गाड़ियां हो तो आग पर जल्द काबू पाया जा सकता है।
21 दिन में ये खाक हुई फैक्टरी:
पिछले 21 दिन में आगजनी की घटनाओं में शहर की चार बड़ी फैक्टरियां जलकर राख हो गई। नुकसान लगभग 30 करोड़ रुपये का हुआ है। 21 मार्च को रिसालू रोड स्थित आनंद इंटरनेशल कंपनी में आग लग गई। आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की 25 गाड़ियों को 7 घंटे मशक्कत करनी पड़ी। 8 अप्रैल को जाटल रोड पर बाथमेट कंपनी में आग लगी। 6 घंटे में आग पर काबू पाया जा सका। 9 अप्रैल को मॉडल टाउन में जिंदल फैब्रिक में आग लगी। दमकल विभाग ने इस पर आग बूझाने के लिए 90 हजार लीटर पानी डाल दिया था, लेकिन आग पर काबू 10 घंटे बाद पाया जा सका था। 11 अप्रैल को हाली पार्क के पास डिंपल इंटरप्राइजेज में आग लगी। करोड़ों का सामान जलकर राख हो गया।
उद्योगपतियों ने ये रखी अपनी मांगे:
- शहर में फायर गाड़ियों की संख्या को बढ़ाया जाए और गाड़ियों को अलग अलग लोकेशन पर खड़ा किया जाए।
- गाड़ियों का रख रखाव ठीक प्रकार से किया जाए, ताकि पानी की प्रेशर बन सके।
- दमकल विभाग के लिए पानी भरने वाले स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि गाड़ियों को जल्द से जल्द दोबारा पानी भरा जा सके।
- कॉल के बाद गाड़ियां जल्द से जल्द साइट पर पहुंचे।
- प्रशासन समय समय पर दमकल विभाग की मॉक ड्रिल कराए।
- विभाग में प्रशिक्षित दमकल कर्मियों की भर्ती करें।
आग बूझाने का सिस्टम बहुत पुराना : खंडेलवाल
सरकार को अपने फायर सिस्टम में सुधार करना होगा। पानीपत औद्योगिक नगरी है। इसलिए आग लगना भी स्वाभाविक है, लेकिन प्रशासन द्वारा आग पर काबू न पाया जाना गंभीर विषय है। सरकार के पास फायर सिस्टम बहुत कमजोर है। सिस्टम को सुधारने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे। अब भी आगे बूझाने वाला सिस्टम 20 साल पुराना है। फायर सिस्टम को सुधारने के लिए उद्योगपतियों ने विधायक रोहिता रेवड़ी को अपना मांग पत्र दिया है।
विनोद खंडेलवाल, चेयरमैन चैंबर ऑफ कॉमर्स
सीएम ने छह नई गाड़िया देने की घोषणा की थी, अब तक नहीं आई: राणा
सीएम मनोहर लाल ने औद्योगिक नगरी पानीपत के लिए अत्याधुनिक तकनीक वाली छह गाड़ियां पानीपत को देने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक गाड़ियां नहीं आई है। औद्योगिक नगरी की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उद्योगपतियों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा है।
भीम राणा, जिलाध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन पानीपत।
शहर 10 हजार करोड़ रुपये टेक्स देता है, लेकिन सुरक्षा नहीं मिलती: अग्रवाल
हम सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये टेक्स के रूप में देते हैं। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि हमारे उद्योग की रक्षा करें। लेकिन सरकार के पास इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उद्योगपतियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
श्री भगवान अग्रवाल, प्रधान सेक्टर 29 पार्ट वन उद्योगपति एसोसिए शन