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ओवरटाइम खत्म होते ही रोडवेज व्यवस्था चरमराई, यात्रियों को दो दो बसें बदलकर पहुंचाना होगा गतंव्य तक

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150 किलोमीटर से ज्यादा लंबे रूट पर सीधे नहीं जाएंगे बसें, यात्रियों को करनी होंगी चेंज
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एक दिन में 300 किलोमीटर ही चलेंगीं बसें
पानीपत। प्रशासन ने रोडवेज कर्मचारियों का ऑवर टाइम खत्म करके हर माह करोड़ों रुपये की बचत तो की है, लेकिन यह फैसला यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा। हरियाणा रोडवेज लंबे रूट पर बेहतर सफर देने के लिए जानी जाती है, लेकिन इस फैसले के बाद हरियाणा रोडवेज की बसों की लंबी रोटेशन पर सेंध लग रही है। जिस कारण यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह सेंध केवल लंबे रूटों पर ही नहीं बल्कि लोकल रूटों को तो और अधिक प्रभावित कर रहा है। जिस रूट पर एक बस दिन में 6 चक्कर कर रही थी, उसी रूट पर अब घटकर चार चक्कर रह गए हैं। ऑवर टाइम खत्म करके पहले जैसी सुविधाएं देने के लिए विभाग में लगभग दोगुने कर्मचारियों का होना आवश्यक हैं। अगर कर्मचारियों की कमी में ही ऑवर टाइम खत्म करने का फैसला ले लिया गया है, तो सीधे तौर पर बसों की रोटेशन घटेगी और यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। इस फैसले से विभाग में ऑफिसों का काम भी प्रभावित हो रहा है, क्योंकि विभाग में बहुत से दफ्तर ऐसे हैं जिनमें चालक व परिचालक कार्य कर रहे हैं। इस फैसले के बाद चालक व परिचालकों को रूट पर लगा दिया गया है। इन कर्मचारियों की जगह अब सारा कार्यभार क्लर्क व इंस्पेक्टर पर आ गया है।
वहीं रोड पर बस की चेकिंग करने वाले इंस्पेक्टरों को दफ्तरों में लगा देने से रोडवेज बसों में फ्री यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ जाएगी। सीधे शब्दों में कहा जाए तो इस फैसले से रोडवेज विभाग की व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
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नाइट व ऑवरटाइम होते हैं अलग-अलग
कर्मचारियों का ऑवरटाइम खत्म किया गया है, लेकिन किसी लंबे रूट पर जाने के बाद रात को वहीं रुकना पड़े व 300 किलोमीटर के दायरे में ही आए तो ऑवर टाइम नहीं मिलता लेकिन प्रावधानों के अनुसार उनको नाइट का पैसा अवश्य मिलेगा।
सिरसा की बस जाएगी अब बस हांसी तक :
पानीपत डिपो से सिरसा के लिए चलने वाली बस अब केवल हांसी तक ही जाएगी, क्योंकि हांसी तक के चक्कर में ही चालक व परिचालक की ड्यूटी पूरी हो जाती है। वहीं उतराखंड में काठगोदाम तक जाने वाली बस का एक साइड 360 किलोमीटर बनती है, लेकिन चालक परिचालक की ड्यूटी 300 किलोमीटर में खत्म हो जाती है, इस लिहाज से चालक परिचालक अगर पूरा चक्कर करते हैं उनका घंटे ऑवर टाइम बनता है। इस हिसाब से देखे तो रूद्रपुर तक बस चालक व परिचालक की ड्यूटी खत्म हो जाती है। जहां उन्हें नाइट का लगानी पड़ेगी। इसी तरह से अन्य कईं रूट प्रभावित हो रहे हैं।
क्या है ड्यूटी टाइम :
कर्मचारियों से सप्ताह में 48 व दिन में 8 घंटे की ड्यूटी लेनी होती है, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों के घंटे मिनटों के हिसाब से नहीं किलोमीटर के हिसाब से तय होते हैं। कर्मचारी को एक दिन में 300 व सप्ताह में 1800 किलोमीटर की ड्यूटी करनी होती है। इससे ज्यादा किलोमीटर चलने के बाद ऑवर टाइम शुरु हो जाता है।
लंबे रूटों पर लगातार काम करने के बाद देनी होगी छुट्टी:
पानीपत डिपो से पांच राज्यों में बसें चलती हैं, जिनपर चलने वाले चालकों व परिचालकों को अब सप्ताह में तीन से चार दिन का रेस्ट मिलेगा। किलोमीटर के हिसाब से देखे तो प्रत्येक कर्मचारी से लंबे रूट पर 300 किलोमीटर ही काम लिया जा सकता है व लोकल पर 160 से 260 के बीच में होता है। दिन में इससे ज्यादा चलने के बाद ऑवर टाइम लगना शुरू हो जाता है। इसी हिसाब से एक कर्मचारी को एक सप्ताह में 1800 किलोमीटर ही चलना पड़ता है। इसी संदर्भ में पानीपत से कटरा जाने वाली बस का रूट 1575 से अधिक किलोमीटर बनता है। इस रूट को पूरा होने में नाइट सहित 42 घंटे लगते हैं। किलोमीटर के हिसाब से भी उनके 5 दिन से अधिक की ड्यूटी बन जाती है। यानी इस रूट पर चलने वाले कर्मचारी को सप्ताह में लगभग चार दिन का रेस्ट देना अब जरूरी हो गया है। वहीं जयपुर, कोटद्वार, काठगौदाम, ऋषिकेश, अलवर, सिरसा, अमृतसर, अजमेर सहित ओर भी ऐसे रूट है जिनपर चलने वाले कर्मचारियों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन का अवकाश देना शुरू हो जाएगा, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण यह भी संभव नहीं है।
पंचकूला-चंडीगढ़ से पानीपत तक रह गया रूट, लोगों को करना पड़ रहा बस बदल बदल कर सफर :
पंचकूला व चंड़ीगढ़ से आने वाली बसें इस फैसले के बाद दिल्ली जाने की बजाय पानीपत से ही वापस जा रही है। जिस कारण यात्रियों को बस बदल बदल कर सफर तय करना पड़ रहा है। लगभग सभी लंबे रूटों पर स्थिति यही हैं।
यात्री दिनभर रहे परेशान :
इस फैसले के बाद पानीपत डिपो में दिन भर यात्री परेशान रहे। रोहतक जाने वाले नवनीत व नितेश ने बताया कि वह बस के इंतजार में दो घंटे से खड़े हैं, लेकिन उन्हें बस नहीं मिली। पहले रोहतक के लिए दस से 15 मिनट में बस मिल जाती थी।
पहले भी असफल हो चुका है ऑवर टाइम खत्म करने का फैसला :
1990 में भी विभाग के कर्मचारियों का ऑवर टाइम खत्म किया गया था, लेकिन यह फैसला ज्यादा दिन तक लागू नहीं हो पाया और कुछ दिनों बाद ही विभाग में ऑवर टाइम दौबारा से शुरु करना पड़ा।
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रूट चक्कर पहले अब
सींक 6 4
गोला 10 8
गोली माजरा 6 4
बल्ला कोंहड 6 4
अहर कुराना 8 6
उरलाना 8 6
रोहतक 4 2
दिल्ली 3 डेढ़
जींद 6 3
वहीं पानीपत डिपो के कुछ लोकल रूट ऐसे भी थे जिनपर सुबह और शाम एक एक चक्कर करके जींद के एक चक्कर जींद के रूट पर किया जाता था। इस फैसले के बाद दिन में जींद का रूट भी खत्म हो गया है।
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