किले पर 13 मकानों को तोड़ने पर पहुंची टीम लौटी
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। किले पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को एक बार फिर से बड़ी राहत मिल गई है। जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष दीपक अरोड़ा ने बताया कि किला वासियों ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। पांच सितंबर को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को अप्रूव कर दिया था। अब 11 सितंबर तक नगर निगम को हाईकोर्ट में तलब किया गया है।
बता दें कि वीरवार को नगर निगम दस्ता किला वासियों से जमीन का कब्जा छुड़वाने के लिए पुलिस बल के साथ जेसीबी लेकर किले पर पहुंच गया। वहां पहुंचने पर संघर्ष समिति के सदस्य भी किला थाना के बाहर इकट्ठे हो गए। किला वासियों ने नगर निगम कमिश्नर प्रदीप डागर को हाईकोर्ट की याचिका दिखाकर वापस भेज दिया। किला वासियों ने बताया कि उन्होंने हरियाणा गवर्नमेंट के खिलाफ पिटीशन दायर की है जिसमें नगर निगम 11 सितंबर को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेगा। तब तक किला वासियों के लिए एक बार फिर से राहत मिल गई है। 24 अगस्त को नगर निगम दस्ता पुलिस बल के साथ किले पर 27 घरों में से कब्जा छुड़वाने के लिए पहुंच गया था। उस समय किला वासियों ने कोर्ट में अपनी फाइल दायर करने के लिए नगर निगम से 31 अगस्त तक का समय मांगा था, जिसको नगर निगम ने मंजूर कर लिया था। इसके बावजूद 27 में से 14 परिवारों ने ही फाइल दायर की। इस बारे में किला संघर्ष समिति का कहना है कि निगम ने किसी को नोटिस ही नहीं भेज रखा है। किला वासियों में किसी को नहीं पता है कि वह तेरा घर कौन से है, जिनको तोड़ने के लिए नगर निगम दस्ता पहुंचा है।
किला संघर्ष समिति के प्रधान दीपक अरोड़ा ने बताया कि राजेश बंसल व अन्य ने हरियाणा सरकार व अन्य पर केस दायर किया है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में उन्होंने कुछ ऐसे मजबूत पक्ष रखे हैं। इनसे उनका केस अब मजबूत हो गया है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में उन्होंने 124 लोगों के दस्तावेज दिखाए हैं जिन्हें 1947 में पाकिस्तान से आने के बाद पुन: स्थापना पर वहां जमीन दी गई थी। साथ ही उन्होंने कहा कि नगर निगम 43 हजार वर्ग गज जमीन पर अपना मालिकाना हक बताता है वह उन्होंने केस 85 हजार गज जमीन पर कर रखा है। इससे पता चलता है कि नगर निगम को खुद ही नहीं पता है कि किला पर कितनी जमीन है। नगर निगम के पास न तो कोई दस्तावेज है और न ही उनके पास नक्शा है। जिन 13 घरों को हटाने के लिए नगर निगम पहुंचा है उनका किसी को अता पता ही नहीं है की किस घर को नोटिस दिया गया।