स्वास्थ्य विभाग मतलौडा के अस्पताल पर कार्रवाई से हटा पीछे, सवा घंटे मीटिंग के बाद भी पुलिस को नहीं दी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। मतलौडा स्थित एक अस्पताल में बिना परमिशन अल्ट्रासाउंड जांचने का मामला पकड़े जाने के बाद पॉलिटिकल प्रेशर आने पर अब कार्रवाई के लिए भी आगे नहीं आ रहा। जिला एडवाइजरी कमेटी की डेढ़ घंटे चली मीटिंग के बाद भी अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपति के खिलाफ किसी तरह की पुलिसिया कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग व मतलौडा कस्बे में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जिला एडवाइजरी कमेटी की वीरवार को सीएमओ डॉ. संतलाल वर्मा की अध्यक्षता में सीएमओ कार्यालय मीटिंग हुई। जिसमें जिला अटार्नी अशोक बागड़ी व आईएमए के जिला प्रधान डॉ. श्याम कालड़ा शामिल हुए। डिप्टी सीएमओ डॉ. सुधीर बतरा ने कमेटी के सामने मतलौडा स्थित एक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करते पकड़े जाने का मामला रखा। डिप्टी सीएमओ अपनी रिपोर्ट कमेटी के सामने पेश करने के बाद अपने कार्यालय में आ गए। कमेटी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर बंद कमरे में करीब डेढ़ घंटे तक मंथन किया। इस दौरान सीएमओ कार्यालय में कोई भी अधिकारी, कर्मचारी व बाहरी व्यक्ति दाखिल नहीं हो सका। विभागीय सूत्रों की माने तो कमेटी की मीटिंग के बाद अस्पताल संचालक दंपति के खिलाफ किसी प्रकार की शिकायत पुलिस को नहीं दी गई।
पॉलिटिकल प्रेशर के चलते पूरी रिपोर्ट बदलती चली गई
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की माने तो विभाग को मतलौडा स्थित उक्त अस्पताल में लिंग जांच करने की सूचना मिली थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने इसी के आधार पर टीम बनाकर डिकॉय की मदद से छापा मारा था। यहां पर महिला डॉक्टर लिंग जांच करती पकड़ी भी गई और उसका पति उसके पास ही खड़ा था। विभागीय टीम ने अस्पताल की दोनों अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील कर दिया था। इसी वक्त पॉलिटिकल प्रेशर टीम पर आना शुरू हो गया। डिप्टी सीएमओ डॉ. सुधीर बतरा के साथ जांच में शामिल डॉ. शालिनी मेहता ने पूरी कार्रवाई से अपना नाम वापस ले लिया था। पॉलिटिकल प्रेशर यहीं तक नहीं रहा। इसका असर वीरवार को कमेटी की बैठक पर भी देखा गया।
यह है मामला
स्वास्थ्य विभाग ने सूचना के आधार पर बुधवार को मतलौडा स्थित एक अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन अल्ट्रासाउंड करने का मामला पकड़ा था। विभाग ने डिकॉय की मदद से इसमें सफलता मिली थी। टीम द्वारा अस्पताल संचालक से पीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन की जांच की तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। उनके पास नरेंद्र गर्ग का अल्ट्रासाउंड रजिस्ट्रेशन मिला। जबकि अस्पताल व अल्ट्रासाउंड डॉक्टर दंपति चला रहे थे और उन दोनों के नाम भी रजिस्ट्रेशन से अलग थे। उन दोनों के पास अल्ट्रासाउंड चलाने की डिग्री भी नहीं थी। ऐसे में मामला तूल पकड़ गया था।
वर्जन
मतलौडा स्थित एक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने का मामला एडवाइजरी कमेटी में रखा गया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। कमेटी के फैसले को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।
पुलिस के पास स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपति के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं आई है। इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
राजेंद्र सिंह, प्रभारी, थाना मतलौडा।