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चरखी दादरी के खिलाड़ी से लिए पांच-पांच सौ रुपये, लोडिंग वाले ऑटो बैठकर आए
राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता में भाग लेने आए खिलाड़ियों के लिए प्राइवेट स्कूल में व्यवस्था ठीक, सरकारी में चौपट
भूपेंद्र आट्टा
पानीपत। जिले में चल रही राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था शहर के निजी व सरकारी स्कूलों में की गई है। यहां बच्चों के ठहरने की व्यवस्था की जांच पड़ताल करने के लिए अमर उजाला टीम ने सोमवार देर रात अलग-अलग सरकारी व निजी स्कूलों में जांच पड़ताल की। पड़ताल में पाया कि प्राइवेट स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था दुरुस्त है तो वहीं राजकीय विद्यालयों में व्यवस्था चौपट है।
जीटी रोड स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में राज्य के सभी शतरंज के खिलाड़ी, कबड्डी, थ्रोबॉल, बास्केटबॉल खेलों के लिए अंबाला, कैथल, भिवानी के खिलाड़ियों की ठहरने की व्यवस्था की गई है। जांच में पाया गया कि स्कूल में रात को बच्चे नहा रहे थे और न वहां कोई बल्ब था न ही कोई उचित सुविधा।
उसके बाद मॉडल टाउन स्थित एमकेके स्कूल में व्यवस्था ठीक मिली। एमके के स्कूल में करनाल, जींद, सोनीपत व झज्जर के खिलाड़ियों के लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसमें गेट पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे। पुलिस भी समय-समय पर गश्त लगा रही थी। इसी प्रकार बाल विकास स्कूल में भी रोहतक हिसार पलवल पर मेवात की लड़कियों की टीम ठहरी हुई थी। इनके लिए भी अच्छी व्यवस्था की गई थी।
मॉडल टाउन में ही स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में अंबाला, भिवानी, कैथल, चरखी दादरी की लड़कियों के टीम का ठहराव किया गया है। इसमें दोनों गेट खुले थे। किसी भी गेट पर न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड था और न ही कोई पुलिसवाला गश्त करने पहुंचा था। स्कूल में 50 के लगभग लड़कियां व उनकी महिला कोच ठहरी हुई थीं। स्कूल में बच्चों को मच्छर काट रहे थे।अंबाला के खिलाड़ियों ने बताया कि व्यवस्था केवल ठीक-ठाक ही है, लेकिन न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड है और न ही कोई पुलिस वाला सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। उसके बाद वीवर्स कॉलोनी में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय की व्यवस्था देखी तो उसमें पाया गया कि खिलाड़ी बेंच हटाकर उन्हीं के बीच में चद्दर डालकर लेटे हुए हैं। उन्हें मच्छर काट रहे हैं। एक कमरे में लाइट नहीं थी वहीं दूसरे कमरे में केवल एक दरी पड़ी हुई थी। किसी भी स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य जांच के लिए कोई डॉक्टर की टीम नहीं मिली वहीं सोनीपत के सरोवर की टीम रात भर सड़कों पर भटकते रहे उन्हें यह तक नहीं पता चला कि उन्हें कहां ठहरना है, उनका कोच उनके लिए व्यवस्था करने के प्रयास में शहर में ही घूम रहा था।
चरखी दादरी के खिलाड़ियों से किराया और खाने के लिए लिए गए 500 -500 रुपये
चरखी दादरी की टीम के खिलाड़ियों ने बताया कि उनसे आने जाने का वह खाने का खर्चा लिया गया है। चरखी दादरी से 25 खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में भाग लेने के लिए आए हैं। इनमें से 12 लड़के और 13 लड़कियां हैं। सभी खिलाड़ियों ने आने से पहले 500-500 रुपये जमा कराए हैं। उनको आने के लिए भी एक लोडिंग वाले टेंपो का इंतजाम किया गया था। इसमें ऊपर फटे लगाकर उन पर लड़कों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वहीं लड़कियों के लिए नीचे गद्दे बिछाए गए थे। चरखी दादरी के खिलाड़ी राकेश दीपक मांगेराम सनी हर्ष व अन्य ने कहा कि स्कूल में ठहरने की व्यवस्था भी उनके लिए ठीक नहीं की गई है। स्कूल में जहां वह ठहरे हुए हैं वहां उन्हें मच्छर काटते हैं। उन्हें इस बात का भी नहीं पता था कि पैसे स्कूल संस्थान को देने अनिवार्य हैं इसलिए उन्होंने अपनी जेब से अपने खेल के जुनून के चलते 500-500 रुपये जमा कराए थे।
ये हैं नियम
शिक्षा विभाग व खेल विभाग खिलाड़ियों से खर्चे के नाम पर पैसे नहीं ले सकता
-खिलाड़ियों के लिए मेडिकल सुविधा होनी चाहिए
-ट्रैवल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
-समय पर एनर्जी ड्रिंक मिलनी चाहिए।
-सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए।
-सोने व खाने की व्यवस्था, खिलाड़ियों के अनुसार ही होनी चाहिए।
खिलाड़ियों से पैसे लेने के मामले में जांच होगी
खिलाड़ियों की सिक्योरिटी के लिए उनके कोच साथ आए हुए हैं। पुलिस गश्त लगाती है। खिलाड़ियों से उन्होंने पैसे नहीं लिए हैं। चरखी दादरी के खिलाड़ियों से पैसे लेने का मामला आया है। इसके जिम्मेदार वे ही हैं। इसकी जांच कराएंगे। खिलाड़ियों को अच्छी सुविधाएं देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-श्रीपाल बंसल, एईओ, पानीपत